Reading: स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं मेंटर शिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय बहुविषयक वर्चुअल सम्मेलन का सफल आयोजन “शोध: आरम्भ – समकालीन परिप्रेक्ष्य में चिंतन कौशल” विषय पर किया गया।

स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं मेंटर शिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय बहुविषयक वर्चुअल सम्मेलन का सफल आयोजन “शोध: आरम्भ – समकालीन परिप्रेक्ष्य में चिंतन कौशल” विषय पर किया गया।

RamParkash Vats
2 Min Read

दिनांक 06 मई 2026 राज्य चीफ ब्यूरो विजय समयाल
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य डॉ. सचिन कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। सम्मेलन के विषय पर प्रकाश आईक्यूएसी संयोजक डॉ. कामाक्षी लुंबा ने डाला और वर्तमान समय में शोध आधारित चिंतन कौशल की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. जयन्ती दत्ता, प्रोग्राम डायरेक्टर, यूजीसी एमएमटीसी, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने अपने उद्घाटन संबोधन में विद्यार्थियों में अंतर्विषयक शोध एवं समालोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन में सात तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनकी अध्यक्षता प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने की, जिनमें प्रो. कुलदीप अत्री, डॉ. शशि भूषण (कार्यवाहक प्राचार्य, जीसी सुग भटोली), प्रो. अनुमिता अग्रवाल (नैनीताल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड), डॉ. विपन शर्मा (सहायक प्राध्यापक, इतिहास), डॉ. धन देव (सहायक प्राध्यापक, भूगोल, जीसी अर्की, सोलन), डॉ. वनीत कमल (सहायक प्राध्यापक, पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन, एचपीयू शिमला) तथा डॉ. के. सीमा (सहायक प्राध्यापक, भौतिकी, जीसी नूरपुर) शामिल रहे।
इस सम्मेलन में देशभर से 120 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की और अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिससे सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहे।
समापन सत्र में सुश्री सुमन लता द्वारा सम्मेलन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. चन्द्रकांत सिंह, हिंदी एवं भारतीय भाषा विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, धर्मशाला ने “शोध: चुनौतियाँ और संभावनाएँ” विषय पर प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का समापन डॉ. कामाक्षी लुंबा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।

लो

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!