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भारत के स्वतंत्र सैनानी धारावाहिक लेख (9):एनी बेसेंट: विदेशी होकर भी भारत की आज़ादी, स्वराज, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के लिए संघर्ष करने वाली महान स्वतंत्रता सेनानी

RamParkash Vats
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एनी बेसेंट: विदेशी धरती पर जन्मी, लेकिन भारत की आज़ादी के लिए जीवन समर्पित करने वाली महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी नेता
Editor Ram Parksh vats

एनी बेसेंट भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन महान हस्तियों में शामिल हैं, जिन्होंने विदेशी होते हुए भी भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1847 को लंदन (इंग्लैंड) में हुआ। वे एक समाज सुधारक, शिक्षाविद्, पत्रकार और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थीं। भारत के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक उत्थान में उनका योगदान अविस्मरणीय है।एनी बेसेंट 1893 में भारत आईं और शीघ्र ही भारतीय समाज से गहराई से जुड़ गईं। उन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया। वे मानती थीं कि भारत की आत्मा उसकी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। इसी विचार के चलते उन्होंने भारतीयों में आत्मगौरव और स्वाभिमान की भावना जाग्रत की।

स्वतंत्रता आंदोलन में एनी बेसेंट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने 1916 में होमरूल लीग की स्थापना की और “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” जैसे विचारों को जन-जन तक पहुंचाया। उनके समाचार पत्र न्यू इंडिया और कॉमनवील के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नीतियों की तीखी आलोचना की गई। उनके निर्भीक लेखन ने जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक किया।1917 में ब्रिटिश सरकार ने उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उन्हें नजरबंद कर दिया, लेकिन देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें रिहा करना पड़ा। उसी वर्ष वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, जो किसी विदेशी महिला के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

नी बेसेंट ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का आधार बना। वे मानती थीं कि शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त नींव है।20 सितंबर 1933 को एनी बेसेंट का निधन हुआ, लेकिन उनका जीवन भारत की आज़ादी के संघर्ष में विदेशी होते हुए भी मातृभूमि जैसा समर्पण दिखाने का प्रेरणास्रोत है। एनी बेसेंट निःसंदेह भारत की स्वतंत्रता संग्राम की महान सेनानी थीं, जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में इतिहास में अंकित है।

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