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डॉ. संजीव गुलेरिया, प्रदेश अध्यक्ष न्यू पेंशन स्कीम दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश ने आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ………

RamParkash Vats
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डॉ. संजीव गुलेरिया, प्रदेश अध्यक्ष न्यू पेंशन स्कीम दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश ने आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया

JAWALI ,01 FEB 2026,INDIA NEWS DESK ,RAM PARKASH VATS

उन्होंने कहा कि बजट में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर कोई ठोस और भरोसेमंद पहल नहीं की गई है। जब देश तेजी से आर्थिक प्रगति करते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, तब अपने सेवामुक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान न करना सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में गारंटी का अभाव कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित बना रहा है। डॉ. गुलेरिया ने मांग की कि सरकार को NPS की खामियों को दूर कर एक ऐसी गारंटीकृत पेंशन व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों को भविष्य को लेकर चिंता न करनी पड़े।

डॉ. संजीव गुलेरिया ने बजट में रोजगार सृजन को लेकर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों सरकारी पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन इन्हें भरने और नई भर्तियों के लिए बजट में कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है। आउटसोर्सिंग के नाम पर स्थायी पदों को समाप्त करना युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। इससे न केवल रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है, बल्कि कार्यक्षमता और जवाबदेही पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए सरकार को एक ‘राष्ट्रीय रोजगार कैलेंडर’ जारी करना चाहिए, जिससे युवाओं को स्पष्ट दिशा और भरोसा मिल सके।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश आर्थिक रूप से इतना सशक्त हो रहा है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ उन कर्मचारियों और अधिकारियों को क्यों नहीं मिल रहा, जो दिन-रात सरकारी तंत्र को सुचारु रूप से चलाते हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि विकास की असली चमक केवल बजट के आंकड़ों या बड़े-बड़े दावों में नहीं, बल्कि आम जन, कर्मचारियों और युवाओं के जीवन की सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान में दिखाई देनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह नीतियों में ऐसा संतुलन बनाए, जिससे ‘विकसित भारत’ का सपना केवल नारा न रहकर, हर वर्ग के जीवन में साकार हो सके।

डॉ. संजीव गुलेरिया, प्रदेश अध्यक्ष न्यू पेंशन स्कीम दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश ने आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर देश के युवाओं और सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। सरकार भले ही ‘विकसित भारत’ का नारा बड़े जोश के साथ दोहरा रही हो, लेकिन जिन स्तंभों पर इस विकास की इमारत टिकी है, उन्हीं की अनदेखी किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि बजट में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर कोई ठोस और भरोसेमंद पहल नहीं की गई है। जब देश तेजी से आर्थिक प्रगति करते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, तब अपने सेवामुक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान न करना सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में गारंटी का अभाव कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित बना रहा है। डॉ. गुलेरिया ने मांग की कि सरकार को NPS की खामियों को दूर कर एक ऐसी गारंटीकृत पेंशन व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों को भविष्य को लेकर चिंता न करनी पड़े।

डॉ. संजीव गुलेरिया ने बजट में रोजगार सृजन को लेकर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों सरकारी पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन इन्हें भरने और नई भर्तियों के लिए बजट में कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है। आउटसोर्सिंग के नाम पर स्थायी पदों को समाप्त करना युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। इससे न केवल रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है, बल्कि कार्यक्षमता और जवाबदेही पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए सरकार को एक ‘राष्ट्रीय रोजगार कैलेंडर’ जारी करना चाहिए, जिससे युवाओं को स्पष्ट दिशा और भरोसा मिल सके।

न्होंने सवाल उठाया कि यदि देश आर्थिक रूप से इतना सशक्त हो रहा है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ उन कर्मचारियों और अधिकारियों को क्यों नहीं मिल रहा, जो दिन-रात सरकारी तंत्र को सुचारु रूप से चलाते हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि विकास की असली चमक केवल बजट के आंकड़ों या बड़े-बड़े दावों में नहीं, बल्कि आम जन, कर्मचारियों और युवाओं के जीवन की सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान में दिखाई देनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह नीतियों में ऐसा संतुलन बनाए, जिससे ‘विकसित भारत’ का सपना केवल नारा न रहकर, हर वर्ग के जीवन में साकार हो सके।

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