प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार, लेकिन हथियारों का प्रदर्शन कानूनन अपराध
RAJA KA TALAB (SHIMLA) 1 FEB 2026 ,SCB VIJAY SAMYAL
हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से एक शांत, अनुशासित और कानूनप्रिय राज्य के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन फतेहपुर उपतहसील के राजा का तालाब में आयोजित UGC एक्ट के विरोध में हुआ प्रदर्शन इस छवि पर गहरी चोट करता दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, परंतु जब यह विरोध हथियारों के प्रदर्शन के साथ सड़कों पर उतर आए, तो वह अधिकार नहीं बल्कि सीधा कानून का उल्लंघन बन जाता है। राजा का तालाब के स्थानीय बाजार क्षेत्र में तलवारें, बंदूकें और ढाल (मियाने) लहराते प्रदर्शनकारियों ने न केवल माहौल को भयावह बनाया, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों में असुरक्षा की भावना भी पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो इस बात का प्रमाण हैं कि स्थिति किसी भी क्षण तनावपूर्ण टकराव में बदल सकती थी।
VIEDO
इस प्रदर्शन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि यह सार्वजनिक स्थल पर हुआ, जहां आमजन, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे मौजूद रहते हैं। हथियारों के साथ किया गया प्रदर्शन न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह समाज में डर का वातावरण भी पैदा करता है। स्थानीय व्यापार मंडल द्वारा एहतियातन बाजार बंद रखने का आह्वान इस बात का संकेत है कि व्यापारी और आम लोग स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। जब विरोध के नाम पर बाजार बंद हों और लोगों की आजीविका प्रभावित हो, तो यह आंदोलन अपनी नैतिक और सामाजिक वैधता भी खो देता है। यह सवाल भी उठता है कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो हथियारों की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या यह शक्ति प्रदर्शन नहीं था, जो कानून को खुली चुनौती देता है?
जनता और सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि विरोध का तरीका ही उसकी पहचान बनता है। शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं, जबकि हिंसा या हथियारों का प्रदर्शन समाज को कमजोर करता है। कई स्थानीय संगठनों ने प्रशासन पर समय रहते सख्त कदम न उठाने का आरोप लगाया है। जिला नूरपुर के पुलिस प्रमुख कुलभूषण वर्मा का कहना है कि वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि क्या जांच के बाद की कार्रवाई पर्याप्त होगी, या फिर ऐसे मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर सख्त संदेश देना अधिक जरूरी था? कानून का डर तभी कायम रहता है, जब उसका पालन बिना भेदभाव के कराया जाए।
राजा का तालाब की घटना केवल एक क्षेत्रीय विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि हिमाचल की भविष्य की शांति के लिए चेतावनी है। जिस प्रदेश को कभी नशे और हथियारों से दूर माना जाता था, वहां यदि खुलेआम हथियारों के साथ प्रदर्शन होने लगें, तो यह ‘शांत हिमाचल’ के ‘उड़ता हिमाचल’ बनने की आशंका को बल देता है। प्रशासन की जरा-सी ढिलाई ऐसे तत्वों को और प्रोत्साहित कर सकती है। आवश्यकता है कि सरकार और प्रशासन स्पष्ट करें कि विरोध का अधिकार है, लेकिन हथियारों का प्रदर्शन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय रहते कठोर कदम उठाए गए तो ही हिमाचल की शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है।

