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राजा का तालाब UGC एक्ट विरोध प्रदर्शन में हथियार लहराने से कानून-व्यवस्था पर सवाल, शांत हिमाचल की छवि को गहरी चोट

RamParkash Vats
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हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से एक शांत, अनुशासित और कानूनप्रिय राज्य के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन फतेहपुर उपतहसील के राजा का तालाब में आयोजित UGC एक्ट के विरोध में हुआ प्रदर्शन इस छवि पर गहरी चोट करता दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, परंतु जब यह विरोध हथियारों के प्रदर्शन के साथ सड़कों पर उतर आए, तो वह अधिकार नहीं बल्कि सीधा कानून का उल्लंघन बन जाता है। राजा का तालाब के स्थानीय बाजार क्षेत्र में तलवारें, बंदूकें और ढाल (मियाने) लहराते प्रदर्शनकारियों ने न केवल माहौल को भयावह बनाया, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों में असुरक्षा की भावना भी पैदा कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो इस बात का प्रमाण हैं कि स्थिति किसी भी क्षण तनावपूर्ण टकराव में बदल सकती थी।

जनता और सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि विरोध का तरीका ही उसकी पहचान बनता है। शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं, जबकि हिंसा या हथियारों का प्रदर्शन समाज को कमजोर करता है। कई स्थानीय संगठनों ने प्रशासन पर समय रहते सख्त कदम न उठाने का आरोप लगाया है। जिला नूरपुर के पुलिस प्रमुख कुलभूषण वर्मा का कहना है कि वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि क्या जांच के बाद की कार्रवाई पर्याप्त होगी, या फिर ऐसे मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर सख्त संदेश देना अधिक जरूरी था? कानून का डर तभी कायम रहता है, जब उसका पालन बिना भेदभाव के कराया जाए।

राजा का तालाब की घटना केवल एक क्षेत्रीय विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि हिमाचल की भविष्य की शांति के लिए चेतावनी है। जिस प्रदेश को कभी नशे और हथियारों से दूर माना जाता था, वहां यदि खुलेआम हथियारों के साथ प्रदर्शन होने लगें, तो यह ‘शांत हिमाचल’ के ‘उड़ता हिमाचल’ बनने की आशंका को बल देता है। प्रशासन की जरा-सी ढिलाई ऐसे तत्वों को और प्रोत्साहित कर सकती है। आवश्यकता है कि सरकार और प्रशासन स्पष्ट करें कि विरोध का अधिकार है, लेकिन हथियारों का प्रदर्शन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय रहते कठोर कदम उठाए गए तो ही हिमाचल की शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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