JAWALI/28/01/2026/ EDITOR RAM PARKASH VATS
रेल विभाग जल्दबाजी न करे, सभी परीक्षणों के बाद ही शुरू करे रेल सेवा पठानकोट–जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर रेलगाड़ियों की बहाली को लेकर जिला कांगड़ा की जनता एक बार फिर ठगी हुई-सी महसूस कर रही है। पिछले करीब तीन वर्षों से बंद पड़ी इस महत्वपूर्ण रेललाइन को लेकर रेल विभाग द्वारा बार-बार दी जा रही तिथियों ने लोगों में उम्मीदें तो जगाईं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। हाल ही में चक्की पुल का ट्रायल कर रेल विभाग के आला अधिकारियों ने 26 जनवरी से रेल सेवाएं बहाल होने का आश्वासन दिया था। कहा गया था कि पठानकोट से सात रेलगाड़ियां अप और सात डाउन दिशा में चलेंगी, लेकिन तय तारीख को जनता रेलगाड़ियों का इंतजार ही करती रह गई।
यह स्थिति केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जनता के बीच भ्रम और अविश्वास भी उत्पन्न हो रहा है। पिछले दो वर्षों से रेल बहाली के नाम पर तारीख पर तारीख दी जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि रेलगाड़ियां अब तक पटरी पर नहीं लौट पाईं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रेल विभाग बिना पूरी तैयारी और सभी तकनीकी परीक्षणों के ही घोषणाएं कर रहा है?
जिला कांगड़ा के नूरपुर, ज्वाली, फतेहपुर, इंदौरा, देहरा, शाहपुर, ज्वालामुखी, कांगड़ा, नगरोटा बगवां, सुलह, पालमपुर, बैजनाथ और जोगिंद्रनगर जैसे विधानसभा क्षेत्रों की बड़ी आबादी रोजमर्रा की आवाजाही के लिए इस रेलमार्ग पर निर्भर है। छात्रों, कर्मचारियों, व्यापारियों और गरीब तबके के लोगों के लिए रेल ही सबसे सस्ता और सुरक्षित साधन रहा है। रेल सेवा बंद होने से इन सभी वर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय इस रेलमार्ग को लगभग भूल चुके हैं। लोकसभा चुनावों के समय यह मुद्दा जरूर उठता है और ब्रॉडगेज का सपना दिखाया जाता है, लेकिन ब्रॉडगेज तो दूर, नैरोगेज लाइन की भी समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही। पंचायत ढन की प्रधान बीना देवी, नरगाला के प्रधान शिव धीमान, पलौहड़ा के प्रधान रघुवीर सिंह भाटिया, हरसर पंचायत के पूर्व प्रधान देश राज व हाकम सिंह, भरमाड़ के प्रधान सुशील कुमार, लुधियार की पूर्व प्रधान प्रवीणा देवी और मतलाहड़ के प्रधान अश्विनी चौधरी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने साफ कहा है कि रेलगाड़ियों के बंद होने से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।जनता का यह भी आरोप है कि रेल विभाग जानबूझकर देरी कर रहा है और शायद बरसात शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि बारिश के मौसम में अक्सर रेल सेवाएं फिर से रोक दी जाती हैं।
इससे यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं अधूरी तैयारियों के कारण जल्दबाजी में रेल चलाकर बाद में फिर बंद न कर दी जाए।ऐसे में सबसे जरूरी है कि रेल विभाग जल्दबाजी न करे। केवल तारीखें घोषित करने के बजाय सभी तकनीकी, संरचनात्मक और सुरक्षा संबंधी परीक्षण पूरी तरह से किए जाएं। जब रेलमार्ग हर दृष्टि से सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए तैयार हो, तभी रेल सेवाओं की औपचारिक शुरुआत की जाए। इससे न केवल जनता में भरोसा बनेगा, बल्कि बार-बार पैदा होने वाले भ्रम और नाराजगी से भी बचा जा सकेगा।केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से जनता की स्पष्ट मांग है कि पठानकोट–जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर रेलगाड़ियों की आवाजाही पूरी तैयारी और पारदर्शिता के साथ शुरू की जाए। आधी-अधूरी घोषणाओं से बेहतर है कि ठोस काम हो, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रही जनता को स्थायी और भरोसेमंद राहत मिल सके।

