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संविधान के प्रति आस्था ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति

RamParkash Vats
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77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ का देशवासियों के नाम संबोधन केवल एक औपचारिक संदेश नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा—संविधान—के प्रति गहन आस्था और विश्वास का सशक्त उद्घोष था। उनका यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है, जब देश और दुनिया अनेक उतार-चढ़ावों, चुनौतियों और परिवर्तनों के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में संविधान के प्रति निष्ठा, उसकी सर्वोच्चता और नागरिकों की भूमिका पर दिया गया उनका संदेश विशेष महत्व रखता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है। यह मजबूती किसी एक सरकार, संस्था या व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस संविधान से आती है जो आज़ादी के बाद देश को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की सबसे बड़ी ताकत कोई हथियार नहीं, बल्कि हमारा संविधान है—जो समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित है।

आजादी के बाद भारत को तोड़ने की अनेक कोशिशें हुईं। कभी क्षेत्रीयता के नाम पर, कभी भाषा, जाति या धर्म के आधार पर देश की एकता को चुनौती दी गई। लेकिन संविधान ने हर बार देश को संभाला, दिशा दी और आगे बढ़ने की ताकत प्रदान की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ठीक ही कहा कि संविधान का सबसे बड़ा संरक्षक कोई और नहीं, बल्कि भारत का नागरिक है। जब तक नागरिक संविधान को समझेंगे, मानेंगे और उसके अनुरूप आचरण करेंगे, तब तक कोई भी शक्ति देश को कमजोर नहीं कर सकती।

अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान से ऊपर कोई भी व्यवस्था या सत्ता नहीं हो सकती। संविधान सर्वोत्तम है, वही देश का मुकुट है और उसी की मजबूती पर भारत का भविष्य टिका है। यह संदेश लोकतांत्रिक मर्यादाओं की याद दिलाता है, जहां सत्ता का स्रोत जनता होती है और उसकी सीमाएं संविधान तय करता है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने भारत की नींव को मजबूत किया। गांधी जी ने नैतिकता और सत्य का मार्ग दिखाया, नेहरू ने आधुनिक भारत का सपना देखा, पटेल ने देश को एकता के सूत्र में पिरोया और डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की गारंटी दी। इन सभी का साझा उद्देश्य एक ऐसा भारत बनाना था, जो मजबूत, समावेशी और न्यायपूर्ण हो।

अपने संबोधन के अंत में योगी आदित्यनाथ ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में कहा कि संविधान भारत की आत्मा है और भारत के लोगों की आत्मा ही संविधान है। यही कारण है कि संविधान सर्वोत्तम और श्रेष्ठ है। यह कथन केवल विचार नहीं, बल्कि एक आह्वान है—कि हर नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाए।

गणतंत्र दिवस पर दिया गया यह संदेश हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल उत्सव का विषय नहीं, बल्कि सतत जिम्मेदारी है। संविधान के प्रति श्रद्धा और विश्वास ही भारत को आने वाले समय में और अधिक सशक्त बनाएगा।

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