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कार-पूलिंग के नाम पर अवैध टैक्सी संचालन, सरकार की चुप्पी पर सवाल

RamParkash Vats
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कार-पूलिंग के नाम पर चर्चित BlaBlaCar को लेकर आमजन में यह धारणा बन चुकी है कि यह कोई सरकारी अथवा सरकार से मान्यता प्राप्त परिवहन सेवा है, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। BlaBlaCar न तो सरकारी ऐप है और न ही किसी सरकारी योजना के अंतर्गत संचालित होता है। यह एक विदेशी निजी कंपनी का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका भारत में संचालन किसी स्पष्ट सरकारी अधिसूचना या परिवहन नीति के दायरे में नहीं आता। इसके बावजूद, आम नागरिक इसे वैध टैक्सी विकल्प मानकर उपयोग कर रहा है, जो अपने-आप में गंभीर चिंता का विषय है।
समस्या तब और गहराती है जब इस प्लेटफॉर्म की आड़ में निजी (सफेद नंबर प्लेट) वाहनों से खुलेआम टैक्सी संचालन किया जा रहा है। बुकिंग होते ही यह तय हो जाता है कि वाहन किस समय, किस स्थान से चलकर किस गंतव्य तक जाएगा—यह व्यवस्था कार-पूलिंग नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यावसायिक टैक्सी सेवा का स्वरूप ले चुकी है। इससे मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि बिना परमिट, बिना व्यावसायिक पंजीकरण और बिना किसी जवाबदेही के यात्रियों को ढोया जा रहा है।
इस अवैध व्यवस्था का सबसे बड़ा शिकार वे टैक्सी चालक और वाहन मालिक हो रहे हैं, जिन्होंने नियमों के तहत परमिट लिए, भारी शुल्क चुकाया, बीमा और करों का बोझ उठाया। जब निजी वाहन बिना किसी कानूनी बाध्यता के वही काम करते हैं, तो यह न केवल अनुचित प्रतिस्पर्धा है, बल्कि सरकार की परिवहन नीति पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। नियमों का पालन करने वाले टैक्सी चालकों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
यात्रियों की परेशानी भी कम नहीं है। शिकायतें सामने आ रही हैं कि यदि पर्याप्त सवारी न मिले, तो चालक मोबाइल फोन बंद कर देते हैं या यात्रा का समय मनमाने ढंग से आगे बढ़ा देते हैं, जिससे यात्री घंटों असमंजस में फंसे रहते हैं। ऐसे मामलों में न प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय होती है और न ही किसी सरकारी एजेंसी की।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पूरा गोरखधंधा परिवहन विभाग और आरटीओ की जानकारी में होने के बावजूद बेरोकटोक जारी है। न निगरानी है, न स्पष्ट दिशा-निर्देश और न ही सख्त कार्रवाई। यह स्थिति या तो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है या फिर मौन सहमति को।
अब समय आ गया है कि सरकार इस भ्रम और अराजकता को समाप्त करे। या तो कार-पूलिंग को लेकर स्पष्ट, कठोर और पारदर्शी नियम बनाए जाएं, या फिर निजी वाहनों से हो रहे अवैध टैक्सी संचालन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। वैकल्पिक रूप से, यदि सरकार वास्तव में साझा परिवहन को बढ़ावा देना चाहती है, तो सरकारी स्तर पर एक अधिकृत, नियंत्रित और जवाबदेह ऐप शुरू किया जाना चाहिए।
अन्यथा, कार-पूलिंग के नाम पर चल रही यह व्यवस्था न केवल कानून का मज़ाक उड़ाती रहेगी, बल्कि नियमों का पालन करने वाले टैक्सी चालकों और आम यात्रियों—दोनों के साथ अन्याय करती रहेगी।

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