मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू,
शिमला 21 जनवरी 2026,राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
देवभूमि हिमाचल अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और सुदृढ़ पोषण के मार्ग पर भी एक नई इबारत लिखने जा रहा है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ‘समग्र स्वास्थ्य’ के लक्ष्य को साधते हुए राज्य की पहली पोषण नीति के निर्माण की ऐतिहासिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की अहम बैठक में स्पष्ट किया कि यह नीति हर नागरिक की थाली में संतुलित आहार और शरीर में बेहतर पोषण सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग: अब भोजन की परख होगी अनिवार्य
प्रदेश में मिड-डे मील, आईसीडीएस और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी योजनाएं वर्षों से जारी हैं, किंतु अब इनके प्रभाव को और अधिक मारक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि:अब योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को मापने के लिए न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग अनिवार्य होगी।आम जनमानस को अपने भोजन में मौजूद पोषक तत्वों, कैलोरी और फोर्टिफिकेशन की सटीक जानकारी मिल सकेगी।इसका मुख्य उद्देश्य समाज में संतुलित आहार के प्रति एक नई चेतना जागृत करना है।
लैब का जाल: शुद्धता की कसौटी पर परखा जाएगा आहार
पोषण नीति को धरातल पर उतारने से पहले सरकार खाद्य जांच के बुनियादी ढांचे को अभेद्य बनाने में जुट गई है। शुद्धता की इस मुहिम के तहत बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:कंडाघाट लैब का कायाकल्प: सोलन के कंडाघाट स्थित ‘कंपोजिट टेस्टिंग लैब’ को अत्याधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए 8.50करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
कांगड़ा में नई लैब का आगाज़: कांगड़ा जिले में 25 करोड़ रुपये की लागत से एक नई फूड टेस्टिंग लैब की स्थापना की जाएगी।क्षेत्रीय विस्तार: मंत्रिमंडल ने पहले ही कांगड़ा, मंडी, शिमला और बद्दी (सोलन) में नई प्रयोगशालाओं के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, ताकि खाद्य सुरक्षा की निगरानी घर-घर तक पहुँच सके।”हमारा लक्ष्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पोषक और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना है। आधुनिक लैब्स और नई नीति के माध्यम से हम एक स्वस्थ हिमाचल की नींव रख रहे हैं।”
कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा कवच
इस पहल का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के बच्चों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इन प्रयोगशालाओं में पर्याप्त स्टाफ और आधुनिक संसाधनों की कमी न होने पाए। पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालन होने से खाद्य मिलावट पर लगाम लगेगी और पोषण के मानकों में सुधार होगा।सरकार का यह विजन हिमाचल को एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित करेगा, जहाँ ‘खाद्य सुरक्षा’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हर नागरिक का ‘पोषण अधिकार’ होगा।

