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विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सुंदर संतुलन और मर्यादा हमारे लोकतंत्र की ख़ूबसूरती है: अमित शाह

RamParkash Vats
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आम आदमी की आस्था, समाज का संचालन और राष्ट्र के चरित्र का प्रमाण मजबूत न्याय व्यवस्था है, जिसका विश्वास बनाए रखने में हम एक समाज के नाते सफल हुए हैं

लोकतंत्र की मजबूती संस्थागत संतुलन और मर्यादाओं से होती है : अमित शाह

नई दिल्ली, 10 मई (ब्यूरो)

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने रविवार को नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta की पुस्तकों “The Bench, the Bar, and the Bizarre” तथा “The Lawful and the Awful” का विमोचन किया। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान की 76 वर्षों की यात्रा में भारत ने लोकतंत्र की जड़ों को बेहद मजबूत किया है

उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं के माध्यम से हुए सभी परिवर्तन देश की जनता ने स्वीकार किए हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।श्री शाह ने कहा कि देश की जनता को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और लोगों को विश्वास है कि अन्याय होने पर न्यायालय के दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्ग की आवाज को न्यायपालिका हमेशा सुनती है और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

गृह मंत्री ने कहा कि संविधान ने कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं को एक-दूसरे के विरोध के लिए नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन, संवाद और पारस्परिक मर्यादाओं से होती है।अमित शाह ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका को मिलकर व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध रोडमैप के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने 76 वर्षों में संवैधानिक मर्यादाओं को बनाए रखते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है।

गृह मंत्री ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की पुस्तकों की सराहना करते हुए कहा कि इन पुस्तकों में न्यायपालिका की गंभीरता के साथ-साथ अदालतों के मानवीय पक्ष, हास्य और व्यंग्य का भी सुंदर चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी भविष्य की चुनौतियों पर भी गंभीर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।अमित शाह ने कहा कि तुषार मेहता ने पुस्तक अपनी माता को समर्पित की है और संयोग से इसका विमोचन ‘मदर्स डे’ के अवसर पर हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में हर दिन मां को समर्पित होता है।

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