नूरपुर, न्यूज इंडिया आजतक,राज्य चीफ ब्यूरो विजय समयाल
कान्ता कॉलेज ऑफ एजुकेशन, (चलबाड़ा) में महाविद्यालय के पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय ठाकुर कुलतार सिंह गोल्डी जी के 45वें जन्मदिवस के अवसर पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह अवसर पूरे महाविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत भावुक और स्मरणीय रहा। कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व, सरल स्वभाव, नेतृत्व क्षमता एवं शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया।

सभा के दौरान स्वर्गीय ठाकुर कुलतार सिंह गोल्डी जी के जीवन से जुड़ी यादों को ताज़ा करने के लिए एक विशेष वीडियो प्रस्तुत की गई। वीडियो में उनके जीवन के प्रेरणादायक क्षण, विद्यार्थियों के प्रति उनका स्नेह, महाविद्यालय के विकास के लिए उनके प्रयास तथा उनके विनम्र व्यक्तित्व को दर्शाया गया। वीडियो देखते समय सभा में उपस्थित अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उनकी यादें एक बार फिर सभी के बीच जीवंत हो उठी हों।
इस अवसर पर उनके बड़े भाई एवं महाविद्यालय के चेयरमैन ठाकुर शुभकरन सिंह जी ने अपने संबोधन में स्वर्गीय ठाकुर कुलतार सिंह गोल्डी जी को याद करते हुए कहा कि वे केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक दयालु, प्रेरणादायक और सभी को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने कहा कि उनकी सोच, उनके संस्कार और शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा सदैव सभी को प्रेरित करती रहेगी।
महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या शिवानी मेहरा ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय ठाकुर कुलतार सिंह गोल्डी जी ने महाविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका विद्यार्थियों के प्रति प्रेम, शिक्षकों के प्रति सम्मान और संस्था के विकास के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इस श्रद्धांजलि सभा में महाविद्यालय का समस्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ तथा बी.एड. के प्रशिक्षु भी उपस्थित रहे। सभी ने नम आंखों और भावुक मन से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण अत्यंत भावुक, शांत और श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा। स्वर्गीय ठाकुर कुलतार सिंह गोल्डी जी की यादों ने सभी के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। यह श्रद्धांजलि सभा न केवल उनकी स्मृतियों को जीवंत करने का माध्यम बनी, बल्कि सभी को उनके जीवन मूल्यों और शिक्षा के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का संदेश भी दे गई।

