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पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता: हिमाचल में खनन नियम सख्त, पारदर्शिता बढ़ी, अवैध खनन पर लगाम, परिवहन सीमा तय, उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित

RamParkash Vats
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शिमला,18/01/2026/SCB VIJAY SAMYAL :
पर्यावरण संरक्षण और खनन गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने गौण खनिज (रियायत) नियम तथा खनिज (अवैध खनन, इसके परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियम 2015 में संशोधन कर खनन के तौर-तरीकों को अधिक सख्त, जवाबदेह और पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया है। 15 जनवरी को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब खनन से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

संशोधन के तहत वन भूमि और गैर-वन भूमि में खनन के लिए सक्षम अधिकारियों की शक्तियों को अलग-अलग स्पष्ट किया गया है। पर्यावरण की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए छोटे क्षेत्रफल के खनन पट्टों पर निचले स्तर पर और बड़े क्षेत्रफल पर उच्च स्तर पर निर्णय लेने की व्यवस्था की गई है। अब 1.5 हेक्टेयर तक के खनन क्षेत्र के लिए राज्य भू-विज्ञानी या प्रधान मुख्य अरण्यपाल को अधिकृत किया गया है, जबकि 1.5 से 3.0 हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए उद्योग विभाग के निदेशक को अधिकार दिए गए हैं। वन भूमि से जुड़े मामलों में प्रमुख निर्णय सहमति और निर्धारित अधिकार क्षेत्र के तहत ही लिए जाएंगे।

खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीलामी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। नीलामी की तिथि से कम से कम 15 दिन पूर्व हिंदी के दो प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और हितधारकों को समय रहते जानकारी मिल सके। इससे मनमानी और बंद कमरे में लिए जाने वाले फैसलों पर रोक लगेगी।

सरकार ने खनिजों के परिवहन और भंडारण के नियम भी सख्त कर दिए हैं। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए मासिक परिवहन सीमाएं तय की गई हैं। खनन अधिकारी एक बार में अधिकतम 10 हजार मीट्रिक टन और प्रति माह 20 हजार मीट्रिक टन तक की अनुमति दे सकेंगे। राज्य भू-विज्ञानी के लिए यह सीमा 30 हजार मीट्रिक टन प्रतिमाह निर्धारित की गई है, जबकि उद्योग निदेशक को 30 से 50 हजार मीट्रिक टन तक की अनुमति देने का अधिकार होगा। 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक परिवहन के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई पट्टा धारक नियमों का उल्लंघन करता है तो उससे बकाया राशि पर 24 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाएगा। सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से न केवल अवैध खनन पर लगाम लगेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राजस्व में भी वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर, यह पहल हिमाचल में खनन को अधिक अनुशासित, पारदर्शी और पर्यावरण-सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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