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शिमला राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया था।
खंडपीठ में शामिल न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा ने रीना देवी व अन्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है मामला?:याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आशा कार्यकर्ता नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि मानदेय और प्रोत्साहन आधारित अंशकालिक कार्य करती हैं। इसके बावजूद 2 मई 2026 के स्पष्टीकरण में उन्हें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।
कोर्ट की टिप्पणी:अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाना उचित नहीं है।
अगली सुनवाई:मामले की अगली सुनवाई 1 जून 2026 को तय की गई है।यह फैसला आशा वर्करों के लिए राहत भरा माना जा रहा है और पंचायत चुनावों में उनकी भागीदारी का रास्ता फिलहाल खुला रखता है।

