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1 धारा 118 की अवहेलना कर जाली हस्ताक्षरों से करोड़ों की जमीन हड़पने का आरोप
2 ग्राम शमोगा में बाहरी कंपनी पर गंभीर आरोप, पीड़ित किसानों ने उठाई जांच व कार्रवाई की मांग
3 फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे हिमाचल में जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और गरीब किसानों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है
सिरमौर / 19 April 2026/ Repoter Kipal Sharma
पीड़ित किसान खेम राज और शिशु पाल का कहना है किबिना उनकी जानकारी के पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई।
सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के ग्राम शमोगा में सामने आया भूमि विवाद अब प्रदेश के गरीब किसानों की सुरक्षा और अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि प्रभावशाली तत्वों द्वारा उनकी कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि प्रशासन और सरकार इस पूरे मामले में अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।पीड़ित किसान खेम राज और शिशु पाल का कहना है कि बाहरी राज्य की कंपनी Wilderness Holiday Pvt. Ltd. द्वारा हिमाचल प्रदेश कास्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की अवहेलना करते हुए उनकी करीब 3 बीघा जमीन को फर्जी दस्तावेजों और कथित जाली हस्ताक्षरों के जरिए हड़पने का प्रयास किया गया है। इस जमीन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।किसानों के अनुसार, बिना उनकी जानकारी के पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार ने कंपनी से जुड़े लोगों पर धमकियां देने और गांव से बाहर करने का दबाव बनाने के आरोप भी लगाए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने हिमाचल में गरीब और सीमांत किसानों की स्थिति को उजागर कर दिया है, जहां वे अपनी ही जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला प्रदेश में “भूमि माफिया” के सक्रिय होने की आशंका को और मजबूत कर सकता है।पीड़ितों द्वारा मुख्यमंत्री, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन को शिकायतें भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे हिमाचल में जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और गरीब किसानों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं।

