शिमला,05, Jan/2026,चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
राजस्व विभाग की वर्षों पुरानी खामियों को दूर करने की दिशा में शिमला जिला प्रशासन की पहल को प्रदेश स्तर पर लागू किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि इस तरह की सख्त और नियमित समीक्षा पूरे हिमाचल प्रदेश में हो, तो राजस्व विवादों में फंसे हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि राजस्व रिकॉर्ड की त्रुटियों के कारण आम नागरिकों का बड़ा हिस्सा वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाता है, जिससे न केवल समय और धन की हानि होती है, बल्कि मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है।
इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटारे को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। शिमला जिला प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड में चली आ रही खामियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए 19 जनवरी को एक अहम समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप करेंगे। इसमें जिले के सभी उपमंडलाधिकारियों (एसडीएम) से राजस्व रिकॉर्ड सुधार और डिजिटलीकरण की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
प्रशासन का उद्देश्य राजस्व मामलों के निपटारे में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों की जमीनी हकीकत को समझना और जनता को हो रही परेशानियों का समाधान निकालना है। एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने उपमंडलों में लंबित राजस्व मामलों, गलत या अधूरे इंतकाल, जमाबंदी में दर्ज त्रुटियों, भूमि वर्गीकरण से जुड़ी गड़बड़ियों तथा रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की स्थिति का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करें। बैठक से पहले प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति सामने लाने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि ठोस और परिणामोन्मुखी निर्णय लिए जा सकें।
बताया जा रहा है कि राजस्व रिकॉर्ड में खामियों के कारण आम लोगों को जमीन की खरीद-फरोख्त, निर्माण अनुमति, बैंक ऋण, विरासत संबंधी मामलों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में रिकॉर्ड समय पर अद्यतन न होने से विवाद उत्पन्न हो जाते हैं, जो आगे चलकर न्यायालयों तक पहुंचते हैं और प्रशासनिक व न्यायिक तंत्र पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
जिला प्रशासन का मानना है कि राजस्व रिकॉर्ड किसी भी जिले की प्रशासनिक रीढ़ होता है। रिकॉर्ड यदि दुरुस्त और अद्यतन हों, तो न केवल नागरिकों को सीधी राहत मिलती है, बल्कि विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता और गति आती है। इसी दिशा में पूर्व में चलाए गए रिकॉर्ड सुधार और डिजिटलीकरण अभियानों की अब गंभीर समीक्षा की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में उन उपमंडलों की पहचान की जाएगी जहां सुधार कार्यों की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। ऐसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना और स्पष्ट समयसीमा तय की जा सकती है। वहीं जिन उपमंडलों में बेहतर प्रगति सामने आएगी, उन्हें मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की भी संभावना है, ताकि अन्य क्षेत्र उनसे सीख ले सकें।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने संकेत दिए हैं कि यह बैठक केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी। बैठक से निकलने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती, तकनीकी संसाधन और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है। प्रशासन का लक्ष्य तय समय के भीतर राजस्व रिकॉर्ड की प्रमुख खामियों को दूर कर जनता को सुगम, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना है।
प्रशासनिक हलकों का मानना है कि यदि शिमला मॉडल को पूरे प्रदेश में अपनाया जाता है, तो इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और यह पहल हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए वास्तव में एक बड़ी राहत का पैगाम साबित हो सकती है।

