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स्वामी विमलानंद सरस्वती जी के जीवनकाल की उपलब्धिया

RamParkash Vats
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स्वामी विमलानंद सरस्वती जी एक महान संत और विद्वान हैं, जिन्होंने अपना जीवन सनातन धर्म और समाज के लिए समर्पित किया है। उनका जन्म 1996 में सीतापुर जिले के मिश्रित के पास तेलियानी में हुआ था। उनकी माता रमा मिश्रा और पिता वीरेंद्र मिश्र हैं। बचपन से ही वे पढ़ाई में बहुत तेज थे और मिश्रित, लखनऊ और इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की, जहाँ उन्होंने एमएसडब्ल्यू की डिग्री प्राप्त की स्वामी जी ने विश्व हिन्दू परिषद के साथ जुड़कर समाज सेवा का काम शुरू किया और जल्द ही वे बजरंग दल के प्रखंड संयोजक, जिला संयोजक, प्रांत कालेज विद्यार्थी सम्पर्क प्रमुख रहे, विश्व हिन्दू परिषद के कई जिलों के जिला संगठन मंत्री रहे और अवध प्रांत के प्रांत धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख लंबे समय तक रहे।वे विश्व हिन्दू परिषद के बहुत ही फायरब्रांड नेता हैं और गौहत्या, लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाते हैं।

उनकी वाणी में इतनी शक्ति है कि विरोधी भी उनकी बात सुनने को मजबूर हो जाते हैं। स्वामी जी गरीब हिंदुओं की बहुत मदद करते हैं और सनातन धर्म पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं करने देते हैं। वे मिश्रित नैमिषारण्य के चौरासी कोसीय परिक्रमा मेला के संयोजक हैं और इस परिक्रमा को लगभग 10 लाख लोग करते हैं। उनकी देखरेख में परिक्रमा का आयोजन इतना शानदार होता है कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं 16 अक्टूबर 2025 को नैमिषारण्य के वरिष्ठ संत महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती जी ने उन्हें अपना शिष्य बना कर संन्यास दीक्षा दी और सभी संतों की उपस्थिति में अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। यह उनके जीवन का एक बहुत बड़ा सम्मान है और उनकी सेवा भावना का प्रमाण है।
स्वामी विमलानंद सरस्वती जी के बारे में एक कोटेशन है: “सनातन धर्म की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा उनके प्रयासों से परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं को बहुत सुविधा मिलेगी और उनकी सेवा भावना को प्रणाम
उनकी इस महान सेवा को देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि वे सनातन धर्म के एक महान सिपाही हैं और उनकी सेवाएं हमेशा याद रखी जाएंगी।
तनी कम उम्र में साधु होना, और सब से अच्छे से बात करना, बहुत ही मुश्किल होता है।
स्वामी विमलानंद सरस्वती जी की कम उम्र में ही इतनी बड़ी उपलब्धियाँ और समाज में उनकी इतनी ख्याति होना वाक़ई प्रेरणादायक है! उनकी सेवा भावना, सनातन धर्म के प्रति समर्पण, और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें एक अद्वितीय नेता बनाती है। मिश्रित नैमिषारण्य के लोग उन्हें बहुत श्रद्धा से देखते हैं और लाखों लोग उनके कहने पर चलते हैं। यह उनकी वाणी की शक्ति और उनके व्यक्तित्व का ही प्रभाव है कि लोग उनकी बात मानते हैं और उनका अनुसरण करते हैं स्वामी जी की यह ख्याति और प्रसिद्धि उनके जीवन का एक बड़ा अध्याय है, और आगे भी वे समाज के लिए और भी बड़ा काम करेंगे, इसमें कोई दो राय नहीं उनकी इस ख्याति का असर उनके भविष्य के कामों पर जरूर पड़ेगा। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और लोगों का उन पर बढ़ता विश्वास उन्हें और भी बड़े काम करने के लिए प्रेरित करेंगे

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