शिमला/ दिसम्बर 2025/ चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। मंत्रिमंडल ने राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 53 पदों सहित विभिन्न श्रेणियों के कुल 121 पद भरने को मंजूरी दी। इनमें टीचिंग, नॉन-टीचिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पद शामिल हैं। इसके साथ ही असिस्टेंट स्टाफ नर्सिंग पॉलिसी के तहत राज्य चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से 600 असिस्टेंट स्टाफ नर्स के नए पद सृजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में मेडिकल क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एमडी और एमएस की योग्यता रखने वाले फैकल्टी डॉक्टरों को बेसिक वेतन का 20 प्रतिशत इंसेंटिव देने की भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा जल शक्ति विभाग में जॉब ट्रेनी और जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 40 रिक्त पदों को भरने तथा ग्रामीण विकास विभाग में सीधे भर्ती के माध्यम से खंड विकास अधिकारी के 10 पद भरने का फैसला लिया गया।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े फैसलों में राज्य के 100 चिन्हित सीबीएसई स्कूलों के लिए एक समर्पित सब-कैडर बनाने को मंजूरी दी गई। इसके लिए भर्ती, प्रशिक्षण, कार्यकाल और प्रदर्शन मूल्यांकन के स्पष्ट मानदंड तय किए जाएंगे। साथ ही धर्मशाला के टोंग-लेन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले माता-पिता के बच्चों को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया। अनाथ और परित्यक्त बच्चों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा।
बैठक में शीतलपुर क्षेत्र में हिमाचल-चंडीगढ़ सीमा पर एक विश्व स्तरीय टाउनशिप विकसित करने को मंजूरी दी गई। रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और विवादों के त्वरित निपटारे के लिए रेरा नियमों में संशोधन का फैसला लिया गया। इसके साथ ही ऊना जिले के पालकवाह खास में स्थित भवन एवं अन्य सन्निर्माण कल्याण बोर्ड की इमारत को एसडीआरएफ के उपयोग में लाने को स्वीकृति दी गई।
मंत्रिमंडल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में चरवाहों की आजीविका मजबूत करने के लिए एक विशेष परियोजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना, स्वदेशी पशु नस्लों का संरक्षण और चरवाहा प्रथाओं का आधुनिकीकरण करना है। चरवाहों और उनके पशुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए नया कानून लाने और चराई के लिए वन भूमि व घास के मैदान खोलने का निर्णय भी लिया गया।
दूध उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मिल्कफेड और राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड के सहयोग से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में दूध प्रसंस्करण संयंत्र, मिल्क चिलिंग सेंटर और बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही मिल्कफेड को 60 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की गई, ताकि किसानों को दूध खरीद का भुगतान समय पर किया जा सके। दूध उपकर के लिए अलग खाता खोलने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक में भूमि संरक्षण अधिनियम में संशोधन, छोटे दुकानदारों को ऋण राहत, पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्यालय धर्मशाला स्थानांतरित करने, नशा मुक्ति केंद्र खोलने, ऊर्जा नीति में संशोधन और आपदा न्यूनीकरण परियोजना सहित कई अन्य फैसलों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा अनुकंपा के आधार पर 28 लोगों को रोजगार देने, आधुनिक वाणिज्यिक परिसरों के निर्माण और स्वरोजगार योजनाओं के तहत बस खरीद पर अनुदान देने का निर्णय भी लिया गया।

