शिमला।/29/12/2025/राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में परिवर्तन की चर्चाओं को लेकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। बुधवार को शिमला में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महात्मा गांधी के नाम और विचारधारा को योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलने का प्रयास कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की “गांधी सरनेम से क्या दिक्कत है?”, “मनरेगा नहीं बदलेगा नाम” और “ग्रामीण गरीबों पर हमला बंद करो”। कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है और इसे महात्मा गांधी के नाम से अलग करना उनके योगदान का अपमान है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार योजनाओं के नाम बदलकर अपनी वैचारिक सोच थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों परिवारों को रोजगार की गारंटी दी है और इसमें ‘गांधी’ नाम सामाजिक न्याय, आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा का प्रतीक है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और नाम परिवर्तन जैसी चर्चाएं असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।
वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा का कहना है कि योजना का उद्देश्य और लाभार्थियों के हित सर्वोपरि हैं, नाम को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है….भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता का बयान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मनरेगा के नाम को लेकर उठी बहस केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष का रूप ले चुकी है। एक ओर कांग्रेस इसे गांधी विचारधारा पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा इसे विकास और कार्यकुशलता से जोड़कर देख रही है।फिलहाल, शिमला में हुए इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि मनरेगा और ‘गांधी’ नाम को लेकर सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

