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सच्ची भक्ति की हर संकट में होती है रक्षा: नदिया बिहारी दास/मानगढ़ में नौ दिवसीय संकीर्तन एवं भागवत रहस्य कथा में भक्त प्रह्लाद के चरित्र से मिला कर्मयोग और अटूट आस्था का संदेश

RamParkash Vats
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फतेहपुर KANGRA/28/12/2025 ब्यूरो चीफ विजय समयाल

जिला कांगड़ा की विधानसभा फतेहपुर अंतर्गत जिला मार्ग-27 जसूर–धमेटा–तलवाड़ा स्थित मानगढ़ ॐ शगुन पैलेस में आयोजित नौ दिवसीय संकीर्तन एवं भागवत रहस्य कथा के दौरान रविवार को कथावाचक नदिया बिहारी दास ने भक्तों को सच्ची भक्ति, कर्म और धर्म का संदेश दिया।

कथा के दौरान नदिया बिहारी दास ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति करता है और धर्म के मार्ग पर चलता है, उसकी भगवान हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य फल की चिंता किए बिना कर्म करना है, क्योंकि कर्म ही मनुष्य को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनता है।
कथावाचक ने भक्त प्रह्लाद के चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि उनका जीवन अटूट आस्था, ईश्वर-भक्ति और धर्म-अधर्म के संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद असुर राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र थे, लेकिन असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद वे भगवान विष्णु के परम भक्त बने रहे।

उन्होंने बताया कि प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में रहते हुए ही महर्षि नारद जी से विष्णु भक्ति का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इसी कारण जन्म के बाद से ही वे भगवान विष्णु की आराधना में लीन रहे। हिरण्यकश्यप ने पुत्र को विष्णु भक्ति से रोकने के लिए उन्हें अनेक प्रकार के कष्ट दिए—कभी पहाड़ से फेंकवाया गया, कभी हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया गया और कभी जहरीले सांपों से डसवाया गया, लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे।
कथा में होलिका प्रसंग का वर्णन करते हुए नदिया बिहारी दास ने बताया कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई।

अंत में जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि विष्णु कहां हैं, तो प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान विष्णु सर्वत्र विद्यमान हैं। तभी भगवान विष्णु ने खंभे से नरसिंह रूप में प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस का आनंद लेकर स्वयं को पुण्य का भागीदार बनाया।

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