शिमल/28/12/2025 ब्यूरो चीफ विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश में बीते दो दिनों से चली आ रही रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिले आश्वासन के बाद हड़ताल तत्काल प्रभाव से वापस लेने का एलान किया। हड़ताल की समाप्ति से प्रदेश के अस्पतालों में एक बार फिर रौनक लौटी और इलाज के लिए भटक रहे मरीजों व उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

जनहित के दबाव और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच सरकार और डॉक्टरों के बीच संवाद निर्णायक साबित हुआ। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि डॉ. राघव नरूला की टर्मिनेशन से जुड़े मामले में निष्पक्ष और विस्तृत जांच शुरू करने तथा सेवाएं समाप्त करने के आदेश को रद्द करने के मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए यह फैसला लिया गया है। एसोसिएशन ने कहा कि मरीजों की सेवा सर्वोपरि है और किसी भी आंदोलन से आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सख्त लेकिन संतुलित रुख अपनाते हुए पहले ही डॉक्टरों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की थी। उन्होंने साफ कहा था कि सरकार 75 लाख प्रदेशवासियों के हित में काम कर रही है और न डॉक्टरों के खिलाफ है, न मरीजों के। मुख्यमंत्री के अनुसार हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिसका सीधा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा, इसलिए संवाद और समाधान ही एकमात्र रास्ता है।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद आईजीएमसी शिमला में हुए एक घटनाक्रम से शुरू हुआ था, जिसने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल मचा दी। हड़ताल के दौरान ओपीडी और ऑपरेशन ठप रहे, जिससे जनआक्रोश भी बढ़ा। अब हड़ताल वापसी के साथ निगाहें 3 जनवरी को होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां आगे की रणनीति तय होगी। फिलहाल सरकार की पहल और डॉक्टरों के कदम ने यह संदेश जरूर दिया है कि जनहित में टकराव नहीं, संवाद ही समाधान है।

