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हिमाचल की बेटियों का खेल में परचम, सीमा ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, चंपा की सफलता बनी युवाओं के लिए प्रेरणा

RamParkash Vats
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Chamba /22Dec 2025/Sutra: हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज देश के खेल मानचित्र पर नए कीर्तिमान रच रही हैं। कोलकाता में आयोजित विश्व स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में चंबा की धाविका सीमा ने 25,000 मीटर दौड़ में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित कर दिया। 1 घंटे 26 मिनट 04 सेकंड के शानदार समय के साथ सीमा ने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

दौड़ के हर चक्कर में सीमा का आत्मविश्वास, धैर्य और संघर्ष साफ झलक रहा था। यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि हिमाचल की मेहनत, अनुशासन और खेल संस्कृति की जीत है। इस स्वर्णिम उपलब्धि पर आयोजकों की ओर से सीमा को तीन लाख रुपये नकद पुरस्कार और स्वर्ण पदक प्रदान किया गया, वहीं रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के लिए एक लाख रुपये का अतिरिक्त सम्मान भी मिला।

अपनी सफलता का श्रेय सीमा ने पूरे विनम्र भाव से अपने परिवार, कोच और विशेष रूप से ऑफिशियल पेसर अनीष चंदेल को दिया। बिलासपुर के अनीष चंदेल ने पूरी दौड़ के दौरान सीमा की गति को संतुलित रखा और कठिन क्षणों में उनका हौसला बढ़ाया। सीमा ने कहा कि सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिला परिषद सदस्य मनोज कुमार मनु ने सीमा को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों के खिलाड़ियों को भी समान सम्मान, संसाधन और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि हिमाचल से और भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभर सकें।

इसी क्रम में चंबा की एक और होनहार खिलाड़ी चंपा ठाकुर की उपलब्धि भी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी। कबड्डी विश्व कप विजेता भारतीय टीम की सदस्य चंपा ठाकुर के सम्मान में प्राइमरी टीचर फेडरेशन चंबा द्वारा प्राइमरी स्कूल कुठेड़ में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़े और चंपा को बधाई देते हुए जल्द उनसे व्यक्तिगत मुलाकात का आश्वासन दिया।

चंपा ठाकुर ने इस मंच से अंडर-12 स्कूली खेल प्रतियोगिताओं को पुनः शुरू करने की मांग रखी। उनका कहना था कि इसी उम्र में बच्चों में खेल भावना और अनुशासन विकसित होता है। शिक्षा मंत्री ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया।

विश्व कप जीत के बाद तिरंगा फहराने के पल को याद करते हुए चंपा की आंखों में गर्व साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि विदेश की धरती पर कम भारतीय दर्शकों के बावजूद, जब तिरंगा लहराया गया तो हर खिलाड़ी के दिल में देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा।

सीमा और चंपा जैसी खिलाड़ी आज यह साबित कर रही हैं कि अगर अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो हिमाचल की बेटियां हर मैदान में देश का नाम रोशन कर सकती हैं। ये उपलब्धियां सिर्फ जीत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मजबूत प्रेरणा हैं।

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