Chain Singh Guleria’s courageous, inspirational and selfless act of service is commendable and his selfless dedication towards humanity, News India Aaj Tak team welcomes Editor Ram Prakash Vats and team
ज्वाली क्षेत्र के सिद्धपुर घाड़ पंचायत के गांव झलूं निवासी चैन सिंह गुलेरिया द्वारा मृत्यु उपरांत अपना पूरा शरीर दान करने का संकल्प न केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है, बल्कि यह समूचे समाज के लिए मानवता, संवेदना और निस्वार्थ सेवा का गहन संदेश भी है। ऐसे समय में जब लोग मृत्यु के बाद भी अपने शरीर, संपत्ति और कर्मकांडों को लेकर अनेक परंपराओं में बंधे रहते हैं, चैन सिंह गुलेरिया का यह कदम रूढ़ियों से ऊपर उठकर मानव कल्याण को प्राथमिकता देने का साहसिक उदाहरण है। उनका यह निर्णय यह दर्शाता है कि सच्ची मानवता जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी दूसरों के लिए उपयोगी बनकर अमर हो सकती है। शरीर दान के माध्यम से वे उन असंख्य मेडिकल विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए आशा का माध्यम बनेंगे, जो मानव शरीर की जटिल संरचना को समझकर भविष्य में रोगियों की पीड़ा कम करने का प्रयास करते हैं। यह सोच स्वयं में एक महान प्रेरणा है, जो बताती है कि एक व्यक्ति का संकल्प समाज की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।
चैन सिंह गुलेरिया का मानना है कि शरीर दान एक ऐसा पुण्य कार्य है, जिसमें मृत्यु के बाद भी जीवन का अर्थ बना रहता है। उनका यह विचार मानवता की उस ऊंचाई को छूता है, जहां व्यक्ति अपने अस्तित्व को केवल अपने परिवार या समाज तक सीमित नहीं रखता, बल्कि समूची मानव जाति के हित में सोचता है। मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में शरीर दान की आवश्यकता सर्वविदित है, किंतु जागरूकता और सामाजिक संकोच के कारण इस दिशा में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता। ऐसे में चैन सिंह गुलेरिया जैसे लोग समाज के लिए प्रकाशस्तंभ बनते हैं। उनका परिवार भी इस निर्णय के साथ मजबूती से खड़ा है, जो यह सिद्ध करता है कि जब परिवारों में मानवीय मूल्यों की समझ होती है, तभी ऐसे साहसिक और प्रेरक निर्णय संभव हो पाते हैं। परिवार का यह समर्थन समाज को यह संदेश देता है कि मानव सेवा के मार्ग पर चलने के लिए सामूहिक सहमति और भावनात्मक परिपक्वता आवश्यक है।
आज जब समाज स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और भौतिकता की दौड़ में मानवीय संवेदनाओं को पीछे छोड़ता जा रहा है, चैन सिंह गुलेरिया का यह कदम एक ठहराव की तरह है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है। उनका यह निर्णय केवल एक व्यक्ति का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो लोगों को शरीर दान जैसे विषय पर खुलकर सोचने और निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समाज में ऐसे उदाहरण बढ़ें, तो चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई दिशा मिलेगी और अनगिनत जिंदगियों को लाभ पहुंचेगा। स्थानीय समाजसेवियों और प्रेस क्लब ज्वाली द्वारा की गई सराहना इस बात का प्रमाण है कि समाज ऐसे मानवीय कार्यों को पहचानता और सम्मान देता है। निस्संदेह, चैन सिंह गुलेरिया का यह संकल्प मानवता के पक्ष में दिया गया एक मौन लेकिन अत्यंत प्रभावशाली संदेश है, जो यह सिखाता है कि सच्ची प्रेरणा शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से जन्म लेती है।

