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हिमाचल प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी एक बड़ी ठगी के मामले में व्यापक कार्रवाई करते हुए 2300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी ने दो राज्यों में एक साथ छापेमारी कर कुल आठ ठिकानों पर दबिश दी, जहां से तीन बैंक लॉकर और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई। जांच एजेंसी लंबे समय से एक संगठित गिरोह पर नजर रखे हुए थी, जिसने क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर हजारों लोगों से अरबों रुपये की ठगी की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निवेशकों को असामान्य मुनाफे का लालच देकर फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप के जरिए धन जुटाया गया।
ईडी की टीमों ने हिमाचल प्रदेश के अलावा एक अन्य राज्य में भी एक साथ छापेमारी की। इस दौरान संदिग्धों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी बरामद की गई। तीन बैंक लॉकरों को सील कर दिया गया है, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लॉकरों में रखी संपत्तियां ठगी से अर्जित धन से खरीदी गई हो सकती हैं।
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, ठगी की रकम को क्रिप्टो वॉलेट्स, शेल कंपनियों और अलग-अलग खातों के जरिए घुमाया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। ईडी अब इन ट्रांजैक्शनों की फॉरेंसिक ऑडिट कर रही है और जल्द ही इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।फिलहाल, किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईडी ने संकेत दिए हैं कि जांच के दायरे में कई बड़े नाम हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में आर्थिक अपराधों को लेकर हलचल तेज हो गई है और क्रिप्टो निवेश के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

