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गौशाला का वीडियो वायरल, गौवंश की हालत देख भड़का जनआक्रोश, वीडियो बनाने वालों से अभद्रता का आरोप, प्रशासन से सख्त कार्रवाई और जांच की मांग तेज

RamParkash Vats
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महमूदाबाद सीतापुर 17 अप्रैल 2026 राज्य ब्यूरो चीफ अनुज कुमार जैन

महमूदाबाद-सीतापुर क्षेत्र में स्थित एक गौशाला से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे इलाके में गहरी संवेदनशीलता और आक्रोश का माहौल बन गया है। विकास खंड रामपुर मथुरा अंतर्गत बताई जा रही इस गौशाला की स्थिति को लेकर सामने आए दृश्य न केवल विचलित करने वाले हैं, बल्कि यह पशु संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं।

वायरल वीडियो और तस्वीरों में गौवंश की जो हालत दिखाई दे रही है, उसने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि गौशाला में पशुओं को पर्याप्त चारा, पानी और आवश्यक देखभाल नहीं मिल पा रही, जिससे वे बेहद दयनीय स्थिति में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इन दृश्यों ने गौशालाओं के संचालन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई को उजागर कर दिया है।

स्थिति को और अधिक गंभीर तब बना दिया जब एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें उन लोगों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया जो इस स्थिति को कैमरे में कैद कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, वीडियो बनाने वालों से उठक-बैठक तक लगवाई गई, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवीय व्यवहार पर भी प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी होना बाकी है, लेकिन वायरल सामग्री ने लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है।

स्थानीय नागरिकों और गौभक्तों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि गौसेवा के नाम पर यदि इस प्रकार की लापरवाही और क्रूरता हो रही है, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंताजनक है। लोगों का मानना है कि यह केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं के साथ अन्याय है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले ने प्रशासन और गौशाला प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि वायरल वीडियो का तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही गौशाला की स्थिति में सुधार के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

जनता ने यह भी अपील की है कि यदि किसी प्रकार की पशु क्रूरता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों पर “पशु क्रूरता निवारण अधिनियम” के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच और कार्रवाई की प्रतीक्षा में है, जबकि क्षेत्र में संवेदनशीलता और चिंता का माहौल बना हुआ है।

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