Shimla/09/12/2025 SCB Vijay Samyal:न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अदालत के पूर्व आदेशों की अवहेलना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उप महाधिवक्ता के आग्रह पर अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए अदालत ने आदेश दिया कि एक सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार कर आवश्यक निर्णय दिया जाए, अन्यथा अगली सुनवाई में अवमानना की कार्रवाई शुरू होगी। यह मामला रजत बुशैहरी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से जुड़ा है, जिसमें 11 जुलाई 2025 के निर्णय को लागू न करने पर याचिकाकर्ता ने न्यायालय की शरण ली। प्रतिवादी अधिकारियों ने वित्त विभाग से स्पष्टीकरण लंबित होने का हवाला देते हुए वेतनमान बढ़ोतरी से इनकार किया, जिसे न्यायालय ने ठोस कारण नहीं माना और यह टिप्पणी की कि विभागीय देरी को आधार बनाकर न्यायालय के आदेशों का अनुपालन टाला नहीं जा सकता।
इसी बीच, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षक कश्मीर सिंह की याचिका पर भी अदालत ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर लागू नीति के अनुसार अतिरिक्त वेतन वृद्धि पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सेवा विस्तार के साथ-साथ एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि भी नीति के तहत प्रदान की जाती है, जबकि उन्हें केवल दो वर्ष का विस्तार ही दिया गया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर विस्तार से न जाते हुए केवल इतना कहा कि अभ्यावेदन लंबित रखना उचित नहीं है और सक्षम प्राधिकारी को समयबद्ध निर्णय लेना ही होगा। इससे स्पष्ट होता है कि अदालत प्रशासनिक सुस्ती पर अब कठोर रुख अपना चुकी है और कर्मचारियों के हक से जुड़े मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश देने के मूड में है।
तीसरी ओर, पीटीए शिक्षिका कुसुम कुमारी की सेवाओं की पुनः नियुक्ति संबंधी याचिका को हाईकोर्ट ने विलंब और निष्क्रियता के आधार पर खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की सेवाएं 2008 में समाप्त कर दी गई थीं और 2014 में जारी अधिसूचना के बावजूद उन्होंने कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया। पहली बार 2025 में याचिका दायर किए जाने को अदालत ने अनुचित देरी माना। अदालत ने कहा कि जिन परिस्थितियों में अन्य पीटीए शिक्षकों को राहत दी गई, वहां याची स्वयं लंबे समय तक निष्क्रिय रही, इसलिए अब पुनः नियुक्ति का दावा न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। इन तीनों मामलों से साफ है कि हाईकोर्ट प्रशासनिक लापरवाही पर लगातार सख्त रुख दिखा रहा है और पात्र कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ता से हस्तक्षेप कर रहा है

