शिमला)/09/12/2025/राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश में कोलडैम परियोजना को लेकर उपायुक्त शिमला की ताज़ा रिपोर्ट ने प्रशासन को झकझोर दिया है रिपोर्ट में बताया गया है कि जलाशय क्षेत्र में जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ रहा है, तलछट का दबाव कई गुना बढ़ गया है और आसपास की पहाड़ियों में गहरी क्षरण-रेखाएँ दिखाई दे रही हैं। भू-स्खलन की बढ़ती घटनाएँ संकेत देती हैं कि यदि स्थिति को तुरन्त नियंत्रित नहीं किया गया, तो कोलडैम के आसपास का बड़ा भू-भाग जलमग्न होने का खतरा पैदा हो सकता है। यह गंभीर आकलन सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने तुरंत उच्चस्तरीय सतर्कता घोषित कर दी है।
स्थिति की नाज़ुकता को देखते हुए शिमला, सोलन और बिलासपुर—तीनों जिलों के उपायुक्तों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। संवेदनशील बस्तियों का सर्वेक्षण, डूब क्षेत्र की संभावित सीमा का निर्धारण, बाशिंदों को जोखिम के प्रति सचेत करने और अस्थायी पुनर्वास स्थलों को तैयार रखने जैसे एहतियाती कदम तेज़ी से लागू किए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भी 24×7 निगरानी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जबकि केन्द्र स्तर से भू-तकनीकी विशेषज्ञ बुलाने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे बांध की संरचनात्मक मजबूती और खतरे की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन हो सके।
इधर स्थानीय निवासियों में चिंता गहराई है। लोगों ने दावा किया है कि पिछले महीनों में कई स्थानों पर जमीन धंसने और दरारें उभरने की शिकायतें की गई थीं, जिनकी अब प्रशासनिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई है। हालांकि राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि हालात नियंत्रण में हैं और किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए सभी एजेंसियाँ सक्रिय हैं, फिर भी यह स्पष्ट है कि कोलडैम पर आई यह रिपोर्ट हिमाचल के लिए केवल तकनीकी चेतावनी नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की बड़ी परीक्षा है। विशेषज्ञों की आगामी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे के निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।

