नई दिल्ली/NIAT/Editor Ram Parkash Vats: संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का प्रतीक है। यह गीत सदियों से देशवासियों के हृदय में बसा हुआ है और लोगों को गुलामी की नींद से जगाने का माध्यम रहा है। ऐसे में आज संसद में इसे लेकर की जा रही बहस का उद्देश्य और आवश्यकता स्पष्ट नहीं है।
प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि क्या इस बहस का मकसद वास्तव में राष्ट्रगीत की गरिमा को संरक्षित करना है या राजनीतिक लाभ के लिए इसे उपकरण बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के प्रति निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक दायित्व देश की आज की समस्याओं पर ध्यान देना है, न कि भावनात्मक बहसों में उलझ जाना। उनके अनुसार, वंदे मातरम पर बहस केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक अवसर के रूप में इस्तेमाल की जा रही है।
प्रियंका ने स्पष्ट किया कि इस बहस के दो प्रमुख कारण हैं। पहला, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इसे राजनीतिक हथियार की तरह प्रयोग करना। दूसरा, देश के स्वतंत्रता संग्राम और इतिहास से जुड़े मामलों में विपक्ष पर दोषारोपण करना। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष का उद्देश्य अतीत में मंडराने वाली पुरानी लड़ाइयों के जरिए वर्तमान राजनीतिक लाभ उठाना है। प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से देश कमजोर हो रहा है और सत्ता में उनके साथी भी इस स्थिति को अंदर ही अंदर मानते हैं।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि वंदे मातरम कण-कण में जीवित है और इस पर किसी बहस की आवश्यकता नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सरकार केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस बहस को हवा दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री भाषण देने में दक्ष हैं, लेकिन तथ्यों और विश्लेषण के मामले में उनकी कमजोरी स्पष्ट है। इस प्रकार की बहस में कला नहीं, बल्कि सही उद्देश्य और वास्तविक नीति की आवश्यकता होती है।
संपादकीय दृष्टि से यह बहस बताती है कि भारत में राजनीतिक दल राष्ट्रीय प्रतीकों को कभी-कभी चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करते हैं। प्रियंका गांधी ने इसे स्पष्ट रूप से उजागर किया और कहा कि राष्ट्रगीत की गरिमा से खेलना देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनके भाषण ने सदन में बहस को नई दिशा दी और राजनीतिक दलों के बीच इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट मतभेद दिखाए।
निष्कर्षतः, प्रियंका गांधी का भाषण वंदे मातरम पर बहस को केवल सांस्कृतिक या ऐतिहासिक विमर्श नहीं मानता, बल्कि इसे राजनीतिक लाभ और ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखता है। उनके अनुसार, देश की वास्तविक समस्याओं—जैसे आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विकास—पर ही सरकार का फोकस होना चाहिए। वंदे मातरम की गरिमा और इसका ऐतिहासिक महत्व राजनीतिक लाभ से ऊपर है और इसे किसी बहस का साधन नहीं बनाया जा सकता।

