नई दिल्ली / 06 दिसंबर 2025 / न्यूज़ इंडिया आजतक ब्यूरो
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा इस बार सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच नई दिशा तय करने वाली ऐतिहासिक कूटनीतिक घटना बनकर उभरी। हैदराबाद हाउस में आयोजित 23वीं वार्षिक शिखर वार्ता में हुए 16 बड़े समझौते और विजन 2030 दस्तावेज़ ने भारत-रूस साझेदारी के लिए अगले दशक का स्पष्ट रोडमैप तय कर दिया। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही कि इसमें दोनों नेताओं ने न केवल पिछले भरोसे को दोहराया, बल्कि आने वाली चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रणनीतिक नींव भी रखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा बयान में कहा कि भारत-रूस मित्रता “ध्रुव तारे की तरह अटल” है—एक ऐसा संदेश जो केवल भावनात्मक संबंध नहीं, बल्कि निरंतरता, सामरिक गहराई और दीर्घकालीन रणनीतिक विश्वास को दर्शाता है। पुतिन ने भी उतनी ही दृढ़ता से भरोसा जताया कि हुए समझौते आने वाले वर्षों में साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।
16 समझौते: एक व्यापक रणनीतिक विस्तार:इस वार्ता में हुए 16 समझौते एक तरह से भारत-रूस संबंधों के तीन प्रमुख स्तंभ—ऊर्जा, रक्षा और व्यापार—को नए आयाम देने वाले साबित हो सकते हैं। विज़न 2030 दस्तावेज़ ने रक्षा उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालीन लक्ष्यों को स्पष्ट कर दिया है।सबसे उल्लेखनीय घोषणा रही—2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य, जो नई सप्लाई चेन, परिवहन कनेक्टिविटी और निवेश सहयोग पर आधारित है। इसके साथ ही, भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ FTA वार्ता को तेज करने का निर्णय दोनों देशों की आर्थिक रणनीति को मजबूती प्रदान करता है।रूस को 30 दिन का फ्री ई-टूरिस्ट वीज़ा, आर्कटिक जल में भारतीय नाविकों की ट्रेनिंग, क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्र सहयोग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर पर करार—ये सभी समझौते आधुनिक साझेदारी को बहुआयामी बनाते हैं।ऊर्जा और रक्षा: साझेदारी का ध्रुव:भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी तेल और कुडनकुलम जैसे परमाणु संयंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस यात्रा में नागरिक परमाणु सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की सहमति दी गई, जबकि रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और मेक इन इंडिया के लिए सड़क और साफ कर दी गई है। ऐसे समय में जब दुनिया में आपूर्ति श्रंखलाएँ अस्थिर हैं, रूस को एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में देखना भारत की दीर्घकालीन रणनीति का आधार है।यूक्रेन संकट पर भारत की साफ संदेशदारी:वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर कहा कि भारत शांति का समर्थक है और हर पहल का स्वागत करेगा। यह भारत की स्वतंत्र, संतुलित और वैश्विक हितों को ध्यान में रखने वाली विदेश नीति की पहचान है। पुतिन ने भी समाधान खोजने की प्रतिबद्धता दोहराई—जो कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण संकेत है।राजनीतिक हलकों में चर्चा और संदेश:राजकीय भोज में कांग्रेस नेतृत्व को निमंत्रण न भेजा जाना राजनीति में चर्चित मुद्दा रहा, जबकि शशि थरूर को आमंत्रित किया जाना एक रोचक संकेत माना गया। इससे स्पष्ट है कि यह दौरा केवल कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि घरेलू राजनीतिक विमर्श में भी अपनी जगह बनाता है।वैश्विक संदर्भ में भारत-रूस मित्रता:BRIC:S+, ग्लोबल साउथ और एशियाई भू-राजनीति के दौर में यह साफ संदेश दिया गया कि भारत-रूस संबंध न तो किसी बाहरी दबाव से प्रभावित होते हैं और न ही परिस्थितियों के अनुसार डगमगाते हैं। पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को मॉस्को आमंत्रित करना इसी भरोसे का प्रमाण है।ध्रुव तारे जैसी स्थिर साझेदारी;पुतिन का यह दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करता है।6 बड़े समझौते—विजन 2030—और सहयोग के नए क्षेत्रों की शुरुआत—यह सब मिला कर यह स्पष्ट करता है कि भारत-रूस संबंध आने वाले दशक में और अधिक मजबूत, स्वतंत्र और वैश्विक परिवर्तनों के बीच मार्गदर्शक भूमिका निभाने वाले होंगे। यह शिखर बैठक वास्तव में उस स्थायी मित्रता का अगला निर्णायक अध्याय है, जो दशकों से दोनों देशों को जोड़कर रखे हुए है।