धर्मशाला | 05 दिसम्बर 2025 | न्यूज़ इंडिया आजतक/चीफ़ ब्यूरो: विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एक नए मोड़ पर है। राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब निजी विद्यालयों के छात्रों के लिए भी वार्षिक परीक्षाओं में न्यूनतम अंक प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है। पाँचवीं और आठवीं कक्षा में पास हुए बिना अब किसी भी छात्र को अगली कक्षा में प्रमोशन नहीं मिलेगा।यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) में किए गए संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने के बाद सामने आया है। पहले यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित थी, लेकिन अब यह हिमाचल के सभी निजी विद्यालयों पर भी प्रभावी रहेगी।
दोबारा मौका—बेहतर तैयारी के लिए एक अवसर:नई नीति बच्चों पर बोझ नहीं डालती, बल्कि उन्हें सुधार का अवसर देती है। यदि कोई छात्र पहली बार में वार्षिक परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसे अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए दूसरा मौका मिलेगा।
हालाँकि, यह भी स्पष्ट है कि यदि विद्यार्थी इस दूसरे अवसर में भी न्यूनतम आवश्यक अंक—33 प्रतिशत—प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे उसी कक्षा में रोका जाएगा। यह परिवर्तन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि शिक्षा की गंभीरता की दिशा में उठाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।
कब से लागू होगी नई व्यवस्था:राज्य के दोनों प्रकार के स्कूलों में इसे अलग-अलग सत्रों से लागू किया जा रहा है—शीतकालीन (Winter Closing) स्कूल: दिसंबर 2025 की परीक्षाओं सेष्मकालीन (Summer Closing) स्कूल: मई 2026 की वार्षिक परीक्षाओं सेनिदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने जिला अधिकारियों को इस संबंध में व्यापक दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।पास होने के नए मानक—क्या है अनिवार्य?केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में किए गए संशोधन के बाद स्पष्ट रूप से दो मुख्य शर्तें निर्धारित की हैं:
समग्र अंक:छात्र को कुल 33% अंक हासिल करना अनिवार्य।विषयवार न्यूनतम:शैक्षिक मूल्यांकन—SA-1 और SA-2—दोनों में प्रत्येक विषय में कम से कम 33% अंक।यह व्यवस्था पहले सरकारी स्कूलों में लागू की गई थी। अनुभव सकारात्मक रहा, जिसके बाद इसे निजी विद्यालयों पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया।
लक्ष्य—बेहतर सीखने की संस्कृति की ओर:विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति छात्रों में प्रतिस्पर्धात्मक और अनुशासित शैक्षणिक माहौल तैयार करेगी। पाँचवीं और आठवीं कक्षा को मजबूत आधारशिला माना जाता है। इन्हीं कक्षाओं में बुनियादी विषयों की समझ विकसित होती है और नई नीति के तहत छात्र इन कक्षाओं को अधिक गंभीरता से लेंगे।यह कदम हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, सीखने में सुधार लाने और छात्रों को उच्च कक्षाओं की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

