Editor Ram Parkash Vats
धर्मशाला, विधानसभा परिसर — तथ्यों और पारदर्शिता से भरा दिन
धर्मशाला स्थित तपोवन विधानसभा परिसर में गुरुवार का दिन शीतकालीन सत्र के दौरान गंभीर, तथ्यों पर आधारित और नीतिगत बहसों से सराबोर रहा। सुबह प्रश्नकाल की शुरुआत से लेकर शाम तक सदन का पूरा वातावरण जवाबदेही, पारदर्शिता और विकास योजनाओं की प्रगति पर केन्द्रित रहा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, मंत्रिपरिषद के वरिष्ठ सदस्य और विपक्ष—सभी ने अपने-अपने सवालों और जवाबों के साथ सदन को सजग रखा। बहसें तीखी भी रहीं और संतुलित भी, लेकिन हर वक्त सदन में तथ्य और नीति केंद्र में रही। इस माहौल ने पूरे दिन की कार्यवाही को अनुशासित, सुव्यवस्थित और सूचनात्मक बनाए रखा।
सीएम कार्यालय के सलाहकार—कार्यशैली, मानदेय और आलोचनाओं के बीच स्पष्टिकरण
दिन की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत तब हुई जब विधायक सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा के प्रश्नों का लिखित उत्तर मुख्यमंत्री ने प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में कुल पाँच सलाहकार नियुक्त हैं, जिनसे विभिन्न नीतिगत और प्रशासनिक विषयों पर केवल मौखिक सलाह ली जाती है। जानकारी का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह रहा कि आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल केवल ₹1 के प्रतीकात्मक वेतन पर कार्य कर रहे हैं—बिना किसी मेडिकल, यात्रा या दैनिक भत्ते के। वहीं अन्य सलाहकारों के मानदेय भी सदन में स्पष्ट रूप से रखे गए—राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू और प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान को ₹2.50 लाख प्रतिमाह मिलते हैं; इंफ्रास्ट्रक्चर सलाहकार अनिल कपिल को ₹2.31 लाख तथा प्रधान सलाहकार रामसुभग सिंह को ₹1.50 लाख। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सलाहकारों की भूमिका परिभाषित है और कार्य-प्रणाली पूरी तरह नियमबद्ध।
कुल्लू–मनाली लेफ्ट बैंक रोड—भारी क्षति के बाद विस्तार की दिशा में कदम
मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ के प्रश्न पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने लेफ्ट बैंक रोड की स्थिति, भविष्य और चुनौतियों पर विस्तृत उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि राइट बैंक की एनएचएआई फोरलेन सड़क हालिया बारिशों में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसके बाद एनएचएआई ने ₹13 करोड़ की राशि लेफ्ट बैंक रोड को सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी को जारी की। मार्ग पर बड़ी संख्या में आवासीय और व्यावसायिक भवनों के बावजूद विभागीय दायरे में आने वाले हिस्से को प्राथमिकता से अपग्रेड किया जाएगा। मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 2022, 2023 और 2025 की आपदाओं के दौरान यही सड़क मनाली के लिए जीवनरेखा सिद्ध हुई थी। इससे सड़क की भौगोलिक और रणनीतिक महत्ता का भी संकेत मिलता है।
एक विषय पर अनेक प्रश्न—सीएम की आपत्ति और अध्यक्ष का आश्वासन
प्रश्नकाल के दौरान सदन में एक तकनीकी मुद्दा भी उठा, जब मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस बात पर आपत्ति जताई कि एक ही विषय पर बार-बार प्रश्न लगाए जा रहे हैं, जिसे सचिवालय द्वारा समन्वयित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पुनरावृत्ति से समय की खपत बढ़ती है और प्रश्नकाल की वास्तविक उपयोगिता पर प्रभाव पड़ता है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने स्पष्ट किया कि यह समस्या मुख्य रूप से स्थगित प्रश्नों के पुनः लगाए जाने के कारण उत्पन्न हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे से एक ही विषय पर आधारित प्रश्नों को जोड़कर सदन में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि समय और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सके। इस संवाद ने सभा की कार्यप्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए।
वाइब्रेंट विलेज योजना से हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्र होंगे सशक्त
जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने सदन को जानकारी दी कि हिमाचल के 703 सीमा-वर्ती गाँव वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल किए गए हैं। इनमें किन्नौर के कल्पा के 194, पूह के 278 और स्पीति के 231 गाँव मौजूद हैं—सभी के सभी चयनित। वर्ष 2022–23 से 2025–26 तक 75 प्राथमिकता वाले गाँवों में भी कार्य-योजनाएँ भेजी जा रही हैं—जिनमें कल्पा के 14, पूह के 41 और स्पीति के 20 गाँव शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि इन गाँवों की संपूर्ण परियोजना रिपोर्ट जिला स्तर से राज्य स्तर और फिर केंद्र के गृह मंत्रालय तक ऑनलाइन भेजी जा रही है। सदन में इस योजना को सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, जनसेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माना गया।
सीवरेज प्रोजेक्ट, पीएमजीएसवाई और सीआरएफ—वित्तीय चुनौतियाँ और राजनीतिक टकराव
गुरुवार का सदन कई विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति से भी रूबरू हुआ। सीवरेज परियोजनाओं पर विधायक केवल पठानिया, सतपाल सत्ती और बलवीर वर्मा ने देरी और धन की कमी पर तीखे सवाल उठाए। उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नाबार्ड फंडिंग किस्तों में आती है और एकमुश्त बजट देना संभव नहीं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने जोड़ा कि यदि केंद्र सहयोग करे तो आगामी बजट में ठोस व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसी बीच पीएमजीएसवाई फेज–III के तहत 254 सड़कें और 43 पुल स्वीकृत होने की जानकारी भी दी गई। सीआरएफ के अंतर्गत 992.77 करोड़ की स्वीकृति होने के बावजूद 10 सड़कों में से 6 रुकी हैं, जबकि 35 प्रस्ताव केंद्र में लंबित हैं। विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाया कि इन परियोजनाओं पर तेजी लाई जाए, जबकि सरकार ने इसे लंबित मंजूरियों और संसाधन सीमाओं से जोड़ा।
दिन का निष्कर्ष—सदन में जवाबदेही और पारदर्शिता की मिसाल
पूरे दिन की कार्यवाही एक बात स्पष्ट करती रही कि हिमाचल विधानसभा का यह सत्र नीति, पारदर्शिता और तथ्य-आधारित संवाद पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सलाहकारों की नियुक्तियों पर स्थिति स्पष्ट हुई, सीमावर्ती और ग्रामीण सड़कों की वास्तविक स्थिति सामने आई, एचआरटीसी की स्टाफ कमी पर भी स्पष्ट दिशा दी गई, और सीवरेज–सड़क परियोजनाओं की वित्तीय जटिलताओं को भी खुलकर रखा गया। सबसे महत्वपूर्ण यह कि मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा को लेकर जो राजनीतिक विवाद चल रहा था, वह भी उनके स्पष्ट वक्तव्य के बाद शांत हो गया। कुल मिलाकर, गुरुवार का दिन सदन में जवाबदेही, तथ्यपरकता और गंभीर नीतिगत विमर्श का दस्तावेज बनकर दर्ज हुआ—एक ऐसा दिन, जिसने लोकतांत्रिक सदन की असली भावना को रेखांकित किया।

