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भारत में ट्रांसजेंडर अधिकार: कानूनी मान्यता, कल्याणकारी योजनाएं, डिजिटल सुविधाएं और संवैधानिक संरक्षण के साथ समावेशी समाज की ओर बढ़ता राष्ट्र

RamParkash Vats
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DELDI/19/11/2025/NIAT:भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 के तहत समानता, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं, जिनकी पुष्टि सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 के ऐतिहासिक एनएएलएसए फैसले में की। इस निर्णय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को “थर्ड जेंडर” का दर्जा प्रदान करते हुए उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दी। इसके आधार पर, सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण के लिए व्यापक नीतिगत ढांचे का निर्माण किया, जिससे समाज में उनके प्रति स्वीकृति, समान अवसर और गैर-भेदभाव का माहौल विकसित हो सके। यह सुधार भारत की सामाजिक प्रगति और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और इसके नियम, 2020 इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कदम साबित हुए हैं। यह अधिनियम 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ, जिसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता, आत्म-परिभाषित लिंग पहचान का अधिकार, भेदभाव से सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित की गई। अधिनियम में पहचान प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, समावेशी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसी के साथ नियम 2020 के तहत राज्यों में ट्रांसजेंडर संरक्षण सेल और कल्याण बोर्डों की स्थापना अनिवार्य की गई, जिनमें कई राज्यों ने कार्रवाई करते हुए ऐसे सेल और बोर्ड गठित किए हैं। ये संस्थान अपराधों की निगरानी, शिकायत निवारण और अधिकारों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

केंद्र सरकार ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से अनेक कल्याणकारी पहलें शुरू की हैं, जिनमें SMILE योजना और गरिमा गृह प्रमुख हैं। SMILE योजना का उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, सुरक्षित आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाना है। आयुष्मान भारत TG प्लस योजना के माध्यम से लिंग-पुष्टि प्रक्रियाओं, हार्मोन उपचार और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल सहित 5 लाख रुपये वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज का प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, गरिमा गृह आश्रय केंद्र ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित और सम्मानजनक रहने की सुविधा प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल का शुभारंभ भी डिजिटल पारदर्शिता और सुविधा की दिशा में बड़ा कदम है, जिसके माध्यम से पहचान प्रमाण पत्र और लाभों तक सरल पहुंच मिली है।

इन सभी सुधारों और उपायों के साथ, भारत ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अधिक समावेशी और समान अवसरों वाले समाज की स्थापना की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिषद नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। वर्ष 2025 में सरकार जागरूकता, क्षमता निर्माण और संवेदनशीलता कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक कलंक को कम करने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। यह समग्र प्रयास इस बात का प्रमाण है कि भारत अब ऐसा राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जहाँ ट्रांसजेंडर व्यक्ति गरिमा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और समान अवसरों के साथ जीवन जी सकें।

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