SHIMLA,न्यूज़ इंडिया आजतक,राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश में चिट्टे और नशे के बढ़ते खतरे के खिलाफ अब सरकार ने जन सहयोग के साथ एक व्यापक आंदोलन छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में रिज मैदान से चौड़ा मैदान तक आयोजित विशाल वॉकथॉन ने पूरे प्रदेश को यह संदेश दिया कि नशा-मुक्ति केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की भविष्य-सुरक्षा का संकल्प है। इस अभियान में विद्यार्थियों, अभिभावकों, सामाजिक संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को नशा-विरोधी शपथ दिलाते हुए कहा कि यह दिन हिमाचल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार नशे के खिलाफ तीन स्तरों पर कार्य कर रही है—पहला, समाज में व्यापक जागरूकता; दूसरा, नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई; और तीसरा, नशे की चपेट में आए युवाओं का उपचार, सहारा और पुनर्वास। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा अपराधी नहीं, बल्कि रोगी हैं, जिन्हें दंड नहीं, बल्कि उपचार और सहानुभूति की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीआईटी-एनडीपीएस कानून के अंतर्गत बार-बार पकड़े गए तस्करों को सीधे जेल भेजा जा रहा है। साथ ही, मृत्युदंड, आजीवन कारावास, 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति ज़ब्ती जैसे कठोर प्रावधान लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए हैं।

सरकार जल्द ही 1000 एंटी-चिट्टा स्वयंसेवकों की नियुक्ति करेगी, जो पुलिस और जनता के बीच पुल का कार्य करेंगे। पंचायत स्तर तक चिट्टा नेटवर्क की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। स्कूल पाठ्यक्रम में नशा-निवारण से जुड़ा नया अध्याय जोड़ा जाएगा,

ताकि बचपन से ही जागरूकता का वातावरण तैयार हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल अब केवल शिक्षा के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के चरित्र, सुरक्षा और जागरूकता के मजबूत स्तंभ बनेंगे। उन्होंने माताओं को इस अभियान का सबसे मजबूत आधार बताते हुए कहा कि जागरूक माताएं पूरे समाज को सही दिशा दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने धार्मिक संस्थाओं से भी इस जन आंदोलन को गति देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब देवभूमि के मंदिर, मठ और धार्मिक मंच इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो चिट्टे का उन्मूलन और तेज़ी से होगा।

मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि “हिमाचल में चिट्टा बेचने वालों के लिए कोई स्थान नहीं।” उन्होंने कहा कि सरकार, पुलिस और जनता मिलकर इस जहर के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने को पूरी तरह तैयार हैं। यह आंदोलन केवल नशे के खिलाफ नहीं, बल्कि हिमाचल के भविष्य, अस्मिता और नई पीढ़ी की सुरक्षा के लिए है।

