वन विभाग की मंजूरी और भूमि अधिग्रहण में देरी मुख्य बाधा | ठेकेदारों के बकाये पर सरकार ने दिया आश्वासन
राज्य ब्यूरो,SHIMLA 06/11/ 2025 स्टेट चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने स्वीकार किया कि राज्य में 250 से अधिक जनसंख्या वाली लगभग 700 बस्तियां आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में वन विभाग की मंजूरी, भू-अधिग्रहण और निजी भूमि न मिलने की वजह से काम अटका हुआ है। ग्रामीणों द्वारा भूमि लोक निर्माण विभाग के नाम न किए जाने से कई परियोजनाएं वर्षों से लटकी हुई हैं। मंत्री ने ग्रामीणों से अपील की कि जहां सड़कें निजी भूमि से गुजरती हैं, वहां गिफ्ट डीड के माध्यम से भूमि उपलब्ध करवाई जाए, ताकि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सड़कें समय पर बन सकें।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के तहत हिमाचल को 294 नई सड़कों की मंजूरी मिली है। इन पर 2271 करोड़ रुपये की लागत से 1538 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा। भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक राहत देते हुए पीएमजीएसवाई-1 के तहत बनी पुरानी सड़कों की मरम्मत को भी इस चरण से जोड़ने की अनुमति दी है। इससे कई जर्जर हो चुके मार्गों के सुधारीकरण में तेजी आएगी।
ठेकेदारों के लंबित भुगतान पर उठ रही चिंताओं के बीच विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि ट्रेजरी में तकनीकी दिक्कत के कारण कुछ बिल रुके हैं, हालांकि कई ठेकेदारों को भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी बकाया राशि निपटा दी जाएगी। मंत्री ने बताया कि इस वर्ष मानसून में भारी वर्षा और भूस्खलन से विभाग को करीब 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जबकि केंद्र से अब तक केवल 19 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। फिलहाल प्रदेश में 50 सड़कें बंद हैं जिन्हें खोलने का कार्य जारी है।
मंत्री ने कहा कि मौसम साफ होने के बाद पूरे प्रदेश में टारिंग का काम तेज गति से चल रहा है, लेकिन कई जगह गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं। इसके लिए सचिव स्तर की एक कमेटी गठित की गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। लापरवाही साबित होने पर ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ देव परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। बिजली महादेव और चंबा में हुए विवादों पर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य से पहले देवताओं से अनुमति ली जानी चाहिए और स्थानीय भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

