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भारत का जोर विधि के शासन पर, न कि किसी देश के खिलाफ : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंहकु

RamParkash Vats
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कुआलालंपुर, (दिल्ली)01 नवंबर 2025/ न्यूज़ इंडिया आजतक डाट काम संपादक राम प्रकाश वत्स

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित 12वें एडीएमएम-प्लस सम्मेलन में कहा कि “भारत का विधि के शासन पर जोर किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हित की रक्षा के लिए है।”“

समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन एवं उड़ान की स्वतंत्रता” पर भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत के दीर्घकालिक और सिद्धांत-आधारित रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।‘

एडीएमएम-प्लस के 15 वर्षों पर चिंतन और आगे का रास्ता तैयार करना’ विषय पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि आसियान के साथ भारत का जुड़ाव लेन-देन से परे है और साझा विश्वास पर आधारित है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र खुला, समावेशी और दबावमुक्त रहना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि “समावेशी सुरक्षा” का अर्थ है — सभी देशों को, उनके आकार या क्षमता की परवाह किए बिना, क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में समान भूमिका मिले। उन्होंने कहा कि स्थिरता का तात्पर्य ऐसे ढांचे से है जो उभरते खतरों से निपटने में सक्षम हों और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हों।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-आसियान साझेदारी सुरक्षा, विकास और स्थिरता के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने एडीएमएम-प्लस को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का अहम हिस्सा बताया।

उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने अब तक तीन विशेषज्ञ कार्य समूहों की सह-अध्यक्षता की है — मानवीय खनन, सैन्य चिकित्सा, और आपदा राहत — तथा अब मलेशिया के साथ आतंकवाद-निरोधक कार्य समूह में साझेदार है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एडीएमएम-प्लस के जरिए संवाद, साझेदारी और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करेगा। “समावेशी सहयोग कारगर है, क्षेत्रीय स्वामित्व वैधता देता है, और सामूहिक सुरक्षा राष्ट्रीय संप्रभुता को मजबूत करती है,”

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