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श्रमिक कल्याण को मिला नया राजनीतिक आयाम — सुक्खू सरकार ने श्रमिकों के उत्थान की खोली नई राह :नरदेव सिंह कंवर

RamParkash Vats
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नूरपुर, 31 अक्तूबर 2025/ चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जहाँ सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं प्रदेश सरकार ने श्रमिक वर्ग के हित में ठोस और जमीनी कदम उठाकर अपने “लोककल्याण मॉडल” को मज़बूती से स्थापित किया है। इसी कड़ी में भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के सौजन्य से नूरपुर नगर परिषद हॉल में एकदिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने की, जबकि पूर्व विधायक अजय महाजन विशेष अतिथि रहे।

कार्यक्रम में बोलते हुए नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि “गांव-गांव तक कल्याण की पहुँच” सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने श्रमिक वर्ग के लिए 14 प्रमुख योजनाएँ चलाई हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों का सामाजिक और आर्थिक उत्थान है।

कंवर ने कहा कि सुक्खू सरकार का यह प्रयास केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनका लाभ “समाज के अंतिम व्यक्ति तक” पहुँचाना इसका मुख्य लक्ष्य है — यह वही दृष्टिकोण है जिसे महात्मा गांधी ने ‘अंत्योदय’ की संकल्पना में परिभाषित किया था।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत में मनरेगा कर्मियों, विधवा महिलाओं, एकल नारियों, दिव्यांगजनों और मंदबुद्धि बच्चों वाले परिवारों को बोर्ड की योजनाओं से जोड़ा जाएगा। यह कदम कांग्रेस सरकार की उस जनमुखी नीति को दर्शाता है जो हर वर्ग को समान अवसर देने पर बल देती है।कंवर ने यह भी बताया कि बोर्ड के माध्यम से विवाह सहायता, चिकित्सा, शिक्षा, पेंशन, दिव्यांग सहायता, अंतिम संस्कार, बेटी के जन्म पर सहायता, मानसिक रूप से मंद बच्चों की देखभाल, विधवा पेंशन तथा आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं का प्रचार पंचायत स्तर तक पहुँचे ताकि कोई पात्र श्रमिक वंचित न रह जाए।

इस अवसर पर विशेष अतिथि अजय महाजन ने भी श्रमिकों से आह्वान किया कि वे कामगार बोर्ड में पंजीकरण अवश्य करवाएँ ताकि वे सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का सीधा लाभ ले सकें। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार ने समाज के गरीब और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए कई क्रांतिकारी योजनाएँ शुरू की हैं।

महाजन ने ‘सुखाश्रय योजना’ का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रदेश में अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का दर्जा दिया गया है — यह हिमाचल के इतिहास में पहली बार हुआ है। उनकी शिक्षा, विवाह और आवास का पूरा खर्च अब सरकार उठाएगी।

इसी तरह ‘सुख शिक्षा योजना’ के तहत विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा और आवश्यक खर्च का प्रावधान भी किया गया है, जो प्रदेश सरकार की संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच को प्रदर्शित करता है।राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह आयोजन कांग्रेस सरकार के लिए सकारात्मक जनसंपर्क अभियान का प्रतीक रहा, जिसमें सत्ता पक्ष ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह केवल शहरी विकास या बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और श्रमिक वर्ग की बेहतरी के लिए भी समर्पित है।

कार्यक्रम में जिला श्रम कल्याण अधिकारी लोकेश शर्मा ने मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों का शॉल व टोपी पहनाकर स्वागत किया। मंच पर वन विकास निगम के निदेशक योगेश महाजन, बीडीओ सुभाष अत्रि, कांग्रेस प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सुशील मिंटू, पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष बलदेव, नगर परिषद पार्षद गौरव महाजन व हरनाम सिंह, तथा पूर्व महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष रोजी जामवाल उपस्थित रहे।कार्यक्रम में श्रमिकों की भारी भागीदारी ने यह संकेत दिया कि प्रदेश की जनता अब कल्याणकारी राजनीति की दिशा में उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। यह स्पष्ट हो गया कि सुक्खू सरकार के लिए श्रमिक हित केवल नारा नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिबद्धता है ।

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