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धर्म–ज्योतिष🔯विवाह में वर्ष और मास का ज्योतिषीय महत्व🕊️राम प्रकाश ज्योतिष केन्द्र भरमाड़ शिब्बो थान

RamParkash Vats
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भारतीय वैदिक ज्योतिष में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो ऊर्जाओं का संगम माना गया है। इसलिए विवाह मुहूर्त निकालते समय केवल नक्षत्र, तिथि और लग्न ही नहीं, बल्कि वर्ष और मास का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। ये दोनों समय के ऐसे संकेतक हैं जो नवविवाहित जीवन की दिशा और दशा पर सूक्ष्म प्रभाव डालते हैं।

    लेखक का मत है कि समाज में अक्सर इस नियम को लेकर असमानता दिखाई देती है।
    लड़कियों का विवाह प्रायः विषम वर्ष में भी कर दिया जाता है, जबकि परंपरा अनुसार सम वर्ष उनके लिए शुभ माने गए हैं। प्रश्न उठता है — जब विवाह के बाद उन्हें ही नए घर में रहना होता है, तो इस नियम की उपेक्षा क्यों की जाती है? क्या यह परंपरा के नाम पर अन्याय नहीं है?इसी प्रकार, अनेक अभिभावक लड़कों के विवाह सम वर्षों में नहीं करते, जबकि यह उनके लिए कम अनुकूल माना गया है। इस दृष्टि से ज्योतिषीय मान्यताओं के प्रति संतुलित और समान व्यवहार आवश्यक है।यद्यपि ये सभी बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, आधुनिक युग में वास्तविक सुख का आधार कुंडली मिलान, ग्रह दशा और सबसे बढ़कर आपसी समझ, आदर और स्नेह ही हैं। वर्ष और मास केवल संकेत हैं — जीवन का सौंदर्य तो तभी है जब प्रेम और विश्वास स्थायी हों।

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