विवाह में वर्ष और मास का महत्व : एक ज्योतिषीय दृष्टि
भारतीय वैदिक ज्योतिष में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो ऊर्जाओं का संगम माना गया है। इसलिए विवाह मुहूर्त निकालते समय केवल नक्षत्र, तिथि और लग्न ही नहीं, बल्कि वर्ष और मास का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। ये दोनों समय के ऐसे संकेतक हैं जो नवविवाहित जीवन की दिशा और दशा पर सूक्ष्म प्रभाव डालते हैं।
सम और विषम वर्ष-मास का ज्योतिषीय आधार
ज्योतिष के अनुसार हर वर्ष और मास में एक विशिष्ट ऊर्जा विद्यमान रहती है
🕊️विषम वर्ष (जैसे 2025, 2027, 2029…) — पुरुष प्रधान, साहसिक और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं।🕊️सम वर्ष (जैसे 2024, 2026, 2028…) — स्त्री प्रधान, कोमल और स्थिर भावों का सूचक माने जाते हैं।🕊️सम मास (चैत्र, ज्येष्ठ, श्रावण, आश्विन, मार्गशीर्ष, फाल्गुन) — स्थिरता, शांति और शुभता के प्रतीक हैं।🕊️ विषम मास (वैशाख, आषाढ़, भाद्रपद, कार्तिक, पौष, माघ) — परिवर्तनशीलता और क्रियाशीलता के द्योतक हैं।
शुभ संयोजन🕊️पारंपरिक मत के अनुसार 🕊️विषम वर्ष में वर का विवाह और सम वर्ष में वधू का विवाह शुभदायक और संतुलित माना गया है।इस योग में दोनों ऊर्जाएँ सामंजस्य बनाती हैं, जिससे दांपत्य जीवन स्थिर, मधुर और दीर्घकालिक सुख देने वाला होता है।
“विषम वर्ष में वर तथा सम वर्ष में वधू का विवाह श्रेष्ठ फलदायक होता है।”🕊️विपरीत संयोजनजब सम वर्ष में लड़का या विषम वर्ष में लड़की का विवाह होता है, तो इसे पारंपरिक दृष्टि से कम अनुकूल कहा गया है। मान्यता है कि ऐसे योग में विचारों का असंतुलन या भावनात्मक मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से विचार
लेखक का मत है कि समाज में अक्सर इस नियम को लेकर असमानता दिखाई देती है।
लड़कियों का विवाह प्रायः विषम वर्ष में भी कर दिया जाता है, जबकि परंपरा अनुसार सम वर्ष उनके लिए शुभ माने गए हैं। प्रश्न उठता है — जब विवाह के बाद उन्हें ही नए घर में रहना होता है, तो इस नियम की उपेक्षा क्यों की जाती है? क्या यह परंपरा के नाम पर अन्याय नहीं है?इसी प्रकार, अनेक अभिभावक लड़कों के विवाह सम वर्षों में नहीं करते, जबकि यह उनके लिए कम अनुकूल माना गया है। इस दृष्टि से ज्योतिषीय मान्यताओं के प्रति संतुलित और समान व्यवहार आवश्यक है।यद्यपि ये सभी बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, आधुनिक युग में वास्तविक सुख का आधार कुंडली मिलान, ग्रह दशा और सबसे बढ़कर आपसी समझ, आदर और स्नेह ही हैं। वर्ष और मास केवल संकेत हैं — जीवन का सौंदर्य तो तभी है जब प्रेम और विश्वास स्थायी हों।

