शिमला/25 अक्तूबर 2025/S .C B. विजय समयाल
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि राज्य में निजी भूमि पर अवैध खनन को तत्काल रोका जाए। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि बिना संबंधित अधिकारियों की पूर्व अनुमति के किसी भी निजी भूमि पर पहाड़ियों की खुदाई या तोड़फोड़ नहीं की जानी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की अध्यक्षता में उस मामले पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया जिसमें कीरतपुर-मनाली राजमार्ग पर व्यावसायिक भूखंडों के विकास के नाम पर अवैध खनन की शिकायत की गई थी।
एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी उपायुक्त और संबंधित अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि निजी भूमि पर अवैध खनन न हो। साथ ही, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को मंडी और बिलासपुर जिलों में छह स्थलों पर अवैध खनन के लिए संबंधित भूमि मालिकों के खिलाफ तीन माह में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
न्यायाधिकरण ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) को भी नियमित निरीक्षण करने और अवैध खनन की पुष्टि होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने के निर्देश दिए। साथ ही, बोर्ड को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि जुर्माने की राशि छह माह के भीतर पर्यावरणीय क्षति की भरपाई में उपयोग हो।यह मामला मंडी के सुंदरनगर निवासी अश्विनी कुमार सैनी की याचिका पर आधारित था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कीरतपुर-मनाली राजमार्ग किनारे निजी मालिकों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। संयुक्त समिति की जांच में मंडी और बिलासपुर में छह स्थलों पर बिना अनुमति खुदाई की पुष्टि हुई, जिनमें एक मामले में मालिक पर ₹1.32 लाख तथा ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया।

