शिमला 15 अक्तूबर 2025 ,चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
शिमला। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सियासी हलकों में गर्मा गई है। प्रदेश सरकार द्वारा 28 स्कूलों को डाउनग्रेड करने के फैसले पर विपक्ष ने तीखा प्रहार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस निर्णय को सरकार की “शिक्षा विरोधी सोच” करार दिया है।जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री महोदय ने महज 48 घंटे पहले ही स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण समारोह में कहा था कि वीरभद्र सिंह ने एक बच्चे के लिए भी स्कूल खोला था, लेकिन अब उसी सरकार ने 28 स्कूलों को डाउनग्रेड कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि “अब इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का क्या होगा? क्या वे 10 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने जाएंगे?”
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने वीरभद्र सिंह की नीतियों से कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार “जनकल्याण की बजाय मित्र-कल्याण” में लगी हुई है।जयराम ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व ‘सोशल वेलफेयर स्टेट’ का होता है, न कि ‘फ्रेंड्स वेलफेयर स्टेट’ का। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि वह एक बच्चे के लिए स्कूल खोलने के मानक तय नहीं कर पा रही, तो कम से कम 10-10 बच्चों वाले स्कूलों को बंद करने का दुर्भाग्यपूर्ण रिकॉर्ड अपने नाम पर दर्ज न करे।उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों ने प्रदेश को तीन साल में ही तीस साल पीछे धकेल दिया है। शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में ऐसे फैसले प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।विपक्ष ने मांग की है कि सरकार तत्काल इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।

