Shimla/News India Aaj Tak /Himachal News Desk / Bureau Chife Vijay Samyal
सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा प्रदेश के लिए व्यापक पोषण नीति तैयार करने के निर्देश जनहित से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आज के समय में बदलती जीवनशैली, मिलावटी खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में यदि सरकार प्रदेशवासियों को संतुलित एवं पोषणयुक्त भोजन के प्रति जागरूक करने के लिए ठोस नीति बनाती है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सराहनीय पहल होगी।मुख्यमंत्री ने 31 मई 2026 तक पोषण नीति तैयार करने के निर्देश देते हुए “फिट हिमाचल” के लक्ष्य को सामने रखा है। यह केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य सुधारने का अभियान बन सकता है। गांवों से लेकर शहरों तक लोगों को यह समझाने की आवश्यकता है कि स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक भोजन कितना आवश्यक है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग में डिजिटलीकरण पर दिया गया जोर भी जनहित में बड़ा कदम है। यदि मरीजों का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, तो अस्पतालों में लंबी कतारों, पंजीकरण संबंधी परेशानियों और जांच रिपोर्ट लेने की दिक्कतों से राहत मिलेगी। डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू होने से उपचार प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा।हिमाचल प्रदेश यदि देश का पहला राज्य बनकर व्यापक पोषण नीति लागू करता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। जनहित की दृष्टि से यह आवश्यक है कि सरकार की इस पहल को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि प्रदेश का हर नागरिक स्वस्थ और जागरूक जीवन जी सके।

