शिमला/14/10/2025/राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई अब विवादों के घेरे में है। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने इस नीति को अव्यवहारिक और जल्दबाज़ी में लिया गया निर्णय करार देते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि जब प्रदेश के लगभग 900 स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद रिक्त हैं, तब ऐसे में इस प्रणाली की सफलता की कल्पना ही व्यर्थ है।
बैठक में उठी चिंता की आवाज़
राजकीय अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक प्रदेश अध्यक्ष नरोतम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में मुख्य संरक्षक नरेश महाजन, कैलाश ठाकुर, महासचिव संजीव ठाकुर, वरिष्ठ उपप्रधान सुरेश नरयाल, और मंडी, कांगड़ा, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर व चंबा जिलों के प्रधानों सहित 25 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक में सर्वसम्मति से यह माना गया कि सरकार ने बिना ज़मीनी तैयारी के कांप्लेक्स प्रणाली को लागू कर दिया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो गया है।
प्रधानाचार्यों के बिना ‘कांप्लेक्स प्रणाली’ अधूरी
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि कांप्लेक्स प्रणाली में पूरा संचालन प्रधानाचार्य पर निर्भर करता है, लेकिन जब अधिकांश स्कूलों में प्रधानाचार्य ही नहीं हैं, तो यह व्यवस्था स्वतः ही चरमराने लगती है।प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में क्लस्टर प्रणाली का समन्वय, निरीक्षण और शिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना लगभग असंभव है। परिणामस्वरूप, यह नीति अपने उद्देश्य से भटक सकती है।
शिक्षा में गिरावट की आशंका
संघ ने चेतावनी दी कि इस जल्दबाज़ी में लागू की गई नीति के कारण प्रदेश की सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता आधारित शिक्षा पिछड़ सकती है।जहां पहले से ही शिक्षक वर्ग पदोन्नति और स्थानांतरण की प्रतीक्षा में है, वहीं नई प्रणाली ने उन पर प्रशासनिक दबाव और बढ़ा दिया है।संघ के अनुसार, शिक्षा की जड़ “शिक्षक” है, और जब शिक्षक ही असंतुलित व्यवस्था में उलझ जाएंगे, तो विद्यार्थियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव अवश्य पड़ेगा।
संघ ने मांग की कि:
सभी प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, टीजीटी, स्कूल प्रवक्ता, न्यू व जेबीटी तथा सीएंडवी वर्ग से संबंधित पदोन्नतियाँ तुरंत लागू की जाएँ।खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि प्रणाली व्यवहारिक रूप से काम कर सके।शिक्षकों का लंबित डीए (महंगाई भत्ता) और एरियर तुरंत जारी किया जाए।इन बिंदुओं को लागू किए बिना शिक्षा सुधार के दावे खोखले माने जाएंगे।
नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता
संघ का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य शिक्षा में सुधार है, लेकिन उसे लागू करने से पहले प्रदेश की परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक था।हर जिला, हर ब्लॉक और हर स्कूल की स्थिति अलग है। ऐसे में एकसमान मॉडल थोपना शिक्षा के क्षेत्र में असमानता और अव्यवस्था को जन्म देगा।यह स्पष्ट है कि कांप्लेक्स स्कूल प्रणाली, सरकार की मंशा भले ही सही हो, परंतु इसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ हैं।जब तक प्रशासनिक ढांचा मजबूत नहीं होगा, और शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के पद भरे नहीं जाएंगे, तब तक किसी भी शिक्षा सुधार योजना का सफल होना कठिन है।सरकार को चाहिए कि वह सुधार से पहले सुनियोजित तैयारी, संवाद और संतुलित ढाँचा सुनिश्चित करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था का आधार मजबूत हो, न कि कमजोर।

