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राजकीय प्राथमिक पाठशाला देवामानल पिछले करीब दो माह से नियमित शिक्षक के बिना संचालित हो रही है। शिक्षक के स्थानांतरण के बाद विद्यालय में अब तक स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिसके चलते 51 विद्यार्थियों की पढ़ाई अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे चल रही है।

पाठशाला प्रभारी करम दास ने बताया कि विद्यालय में नर्सरी, केजी तथा पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 7 कक्षाओं में 51 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय को फिलहाल डेपुटेशन व्यवस्था के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा (DDSE) नाहन को ई-मेल भेजकर विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति अथवा किसी अन्य विद्यालय से लंबी अवधि के लिए अध्यापक प्रतिनियुक्त करने का आग्रह किया गया है।
करम दास ने बताया कि वर्तमान में गांव के दो जेबीटी एवं डीएलएड प्रशिक्षु अपनी टीचिंग प्रैक्टिस के दौरान बच्चों को पढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अभिभावकों द्वारा नियुक्त स्वयंसेवी अध्यापिका भी बच्चों की शिक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से पढ़ाई जारी है, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है।
वहीं समाजसेवी कपिल शर्मा ने कहा कि विद्यालय की समस्याएं वर्षों से चली आ रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग पांच वर्षों से अभिभावक स्वयं आर्थिक सहयोग जुटाकर एक अध्यापिका की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
कपिल शर्मा ने कहा कि विद्यालय भवन की स्थिति भी चिंता का विषय है। नर्सरी से पांचवीं तक की 7 कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों को उचित शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की कि विद्यालय में स्वीकृत शिक्षकों के पदों को शीघ्र भरा जाए तथा भवन संबंधी समस्याओं का भी स्थायी समाधान किया जाए। स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अब विभाग को केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
“51 बच्चे, 7 कक्षाएं और एक कमरा — देवामानल स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल”

