जनता का स्वास्थ्य सर्वोपरि है — और यही किसी उत्तरदायी शासन की सबसे बड़ी पहचान भी है।
राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि हिमाचल से बाहर जाने वाली हर दवा जीवन का संचार करे, जोखिम का नहीं।
जब बात जनता के स्वास्थ्य की हो, तो किसी भी तरह का जोखिम स्वीकार्य नहीं होना चाहिए
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आई 9 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बताया गया कि बच्चों को बुखार और जुकाम के उपचार के लिए जो कफ सिरप दिया गया, उसमें ऐसे रासायनिक तत्व मिले जो वाहनों के कूलेंट और एंटी-फ्रीज प्रक्रिया में उपयोग किए जाते हैं। यह त्रासदी केवल मध्य प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की औषधि सुरक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
इस घटना के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने त्वरित और सराहनीय निर्णय लेते हुए राज्य में निर्मित दो कफ सिरप पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है। हिमाचल की ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी ने न केवल संदिग्ध उत्पादों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं, बल्कि संबंधित कंपनियों के उत्पादन पर भी एहतियाती रोक लगा दी है। यह निर्णय सरकार की सजगता और जनस्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी का स्पष्ट उदाहरण है।
सरकार की पहल सराहनीय, पर स्थायी निगरानी प्रणाली जरूरी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने यह दिखाया है कि जब बात जनता के स्वास्थ्य की हो, तो किसी भी तरह का जोखिम स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर की सक्रियता से यह स्पष्ट है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
परंतु प्रश्न यह है कि क्या ऐसी कार्रवाई केवल किसी त्रासदी या बाहरी चेतावनी के बाद ही होनी चाहिए?हिमाचल प्रदेश देश का फार्मा उत्पादन केंद्र है। यहां हर दिन लाखों डिब्बे सिरप, टैबलेट और इंजेक्शन बनते हैं जो पूरे देश में पहुंचते हैं। ऐसे में दवा गुणवत्ता की नियमित और पारदर्शी निगरानी प्रणाली समय की मांग बन चुकी है।राज्य सरकार को चाहिए कि वह ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी को सशक्त बनाते हुए यह सुनिश्चित करे कि हर दवा की गुणवत्ता की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाए। एक “हेल्थ ऐप” के माध्यम से जनता यह देख सके कि कौन-सी दवा के सैंपल पास हुए हैं और कौन-से फेल। इससे न केवल जनता में विश्वास बढ़ेगा, बल्कि दवा निर्माताओं में भी जवाबदेही आएगी।
नकली और घटिया दवाएँ—जनजीवन पर आघात
हिमाचल प्रदेश में हर महीने औषधि विभाग द्वारा जांचे गए अनेक दवाओं के नमूनों का गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाया जाना जनस्वास्थ्य के लिए गहरी चिंता का विषय है। नकली या घटिया दवाएँ केवल उपभोक्ताओं के साथ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि यह मानवता के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है, क्योंकि इनकी चपेट में आने वाला व्यक्ति न केवल अपने रोग से निजात नहीं पा पाता, बल्कि कभी-कभी अपनी जान भी गंवा देता है। ऐसी दवाएँ चिकित्सा व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं और पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। इसलिए आवश्यक है कि राज्य सरकार और औषधि नियंत्रण प्राधिकरण इस दिशा में कठोरतम दंड प्रावधान लागू करें, ताकि कोई भी निर्माता, वितरक या व्यापारी नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके। जनजीवन की सुरक्षा के लिए यह समय है कि दवा उद्योग में जवाबदेही, पारदर्शिता और नियमित निरीक्षण को कानून के दायरे में सख्ती से लागू किया जाए।
जनता और व्यवस्था — दोनों की साझा जिम्मेदारी
स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा की सुरक्षित खपत केवल प्रशासन या औषधि विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जनता की भी समान रूप से जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना आवश्यक है और बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा या सिरप का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। दवा खरीदते समय हमेशा कंपनी का नाम, बैच नंबर और एक्सपायरी तिथि की जांच करनी चाहिए ताकि नकली या घटिया दवाओं से बचा जा सके। इसके साथ ही, यदि किसी दवा के सेवन के बाद असामान्य लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव दिखाई दें, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत औषधि विभाग या स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएँ, जिससे न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित हो बल्कि समाज में सुरक्षित दवा प्रचलन को भी मजबूती मिल सके। इस प्रकार, जनता की सतर्कता और प्रशासन की जवाबदेही मिलकर एक सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य वातावरण सुनिश्चित कर सकती है।
संवेदनशील शासन की मिसाल बने हिमाचल
हिमाचल सरकार की यह पहल निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है।
दो कफ सिरप पर तत्काल रोक और जांच प्रक्रिया शुरू करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि यह सतर्कता सिर्फ आपात स्थिति तक सीमित न रहे, बल्कि इसे एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था का रूप दिया जाए।
राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि हिमाचल से बाहर जाने वाली हर दवा जीवन का संचार करे, जोखिम का नहीं।

