शिमला 01/10/2025/ राज्य चीफ ब्यौरो विजय समयाल

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2025 पर राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह ने सामाजिक कल्याण और संवेदनशील शासन का नया संदेश दिया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता समाज के उन वर्गों तक पहुँचना है, जिन्हें परंपरागत राजनीति अक्सर केवल आश्वासन तक सीमित रखती रही। वरिष्ठ नागरिकों को “सम्मान के साथ जीवन” देने का आह्वान करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि प्रदेश में 6.71 लाख से अधिक पात्र वृद्धजन प्रतिमाह 1000 से 1700 रुपए तक की सामाजिक सुरक्षा पेंशन पा रहे हैं—वह भी बिना किसी आय सीमा के। यह कदम सीधे-सीधे सामूहिक जनहित से जुड़ा है और राजनीति को संवेदनशील प्रशासन की दिशा देता है।
मुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी दी कि 60 से 69 वर्ष के पुरुषों को 1000 रुपए, महिलाओं को 1500 रुपए और 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को 1700 रुपए की मासिक पेंशन दी जा रही है। साथ ही, “इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि” के अंतर्गत 2.37 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपए मिलना सरकार की “नारी-सम्मान” नीति की ओर इशारा करता है। ऐसे समय में जब महंगाई और सामाजिक असुरक्षा लोगों को दबाव में डाल रही है, यह पेंशन वृद्धजनों के लिए राहत और आत्मसम्मान की गारंटी है। राजनीतिक दृष्टि से यह संदेश है कि राज्य सरकार कल्याणकारी नीतियों को केवल चुनावी वादों तक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज़मीन तक उतारने में सक्रिय है।

ज्वालामुखी में 100 करोड़ की लागत से बनने वाला “सुख आश्रय परिसर” इस नीति का प्रतीक है, जो वृद्धजनों को घर जैसा माहौल और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही, रोगी मित्र योजना जैसे कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि बुजुर्ग केवल पेंशनधारी न रहें, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और गरिमा से जीने का अवसर भी मिले। इस तरह सरकार का संदेश है कि राज्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र सुरक्षा चक्र (Social Safety Net) बनाने को तत्पर है।
सुक्खू सरकार ने केवल वृद्धजनों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया है, बल्कि “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” जैसे कानून लाकर सामाजिक कल्याण को व्यापक बनाया है। देश में पहली बार अनाथ बच्चों को राज्य का बच्चा मानते हुए उनकी 27 वर्ष की आयु तक देखभाल, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की गारंटी दी गई है। मासिक पॉकेट मनी से लेकर प्रोफेशनल पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह संदेश स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक घोषणाओं के बजाय सामाजिक क्रांति का आधार बनाना चाहती है।
राजनीतिक शैली में देखें तो यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि हिमाचल की “समाजवादी सोच” और सामूहिक हित के एजेंडे का प्रदर्शन था। वृद्धजन पेंशन, नारी सम्मान निधि, सुख आश्रय परिसर और चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट जैसे कार्यक्रमों ने प्रदेश की राजनीति को नया विमर्श दिया है—जहाँ सत्ता का उद्देश्य केवल सत्ता में बने रहना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन देना है। यह अवसर विपक्ष के लिए भी चुनौती है कि वे सामाजिक कल्याण के इस मॉडल के सामने अपनी वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करें।

