Reading: संपादकीय मंथन,और चिंतन: नवरात्र और नई कर क्रांति – आमजन के लिए राहत का संदेश {प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन }

संपादकीय मंथन,और चिंतन: नवरात्र और नई कर क्रांति – आमजन के लिए राहत का संदेश {प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन }

RamParkash Vats
4 Min Read
संपादकीय मंथन,और चिंतन: नवरात्र और नई कर क्रांति – आमजन के लिए राहत का संदेश {प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन }

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन केवल नवरात्रि की शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे आर्थिक सुधारों से जोड़कर एक प्रतीकात्मक संदेश भी दिया गया। नवरात्रि, जो शक्ति और नए आरंभ का पर्व है, उसी दिन से नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी सुधार लागू करना सरकार का यह संकेत है कि आर्थिक क्षेत्र में भी एक नई ऊर्जा और गति लाई जा रही है। “जीएसटी बचत उत्सव” जैसे शब्दों के प्रयोग से प्रधानमंत्री ने आम जनता को सीधा यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि इन सुधारों से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ घटेगा और क्रय शक्ति बढ़ेगी। यह भाषण न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव पैदा करता है बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देता है, जिससे यह संदेश जाता है कि विकास और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते है

नवरात्र जैसे पावन पर्व की शुरुआत पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार नवरात्र केवल धार्मिक उल्लास का नहीं, बल्कि आर्थिक बचत का भी पर्व होगा। नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी सुधार लागू होने से हर वर्ग को सीधी राहत मिलेगी। यह कदम न केवल उपभोक्ता की जेब को सुकून देगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नई गति भी प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2017 में जब जीएसटी लागू हुआ था, तब यह अनेक जटिल करों के जाल से देश को बाहर लाने का ऐतिहासिक कदम था। पहले ऑक्ट्रॉय, एंट्री टैक्स, वैट और एक्साइज जैसे दर्जनों कर व्यवस्था को बोझिल बना देते थे। व्यापारी और उपभोक्ता दोनों ही परेशानी उठाते थे। वन नेशन–वन टैक्स का सपना इसी सुधार से साकार हुआ था

आज की घोषणा उसी यात्रा का अगला पड़ाव है। अब टैक्स स्लैब को सरल कर केवल 5% और 18% तक सीमित किया गया है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ेगा। खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ, बीमा, होटल सेवाएँ और अन्य आवश्यक वस्तुएँ या तो टैक्स-फ्री होंगी या कम दर पर उपलब्ध होंगी। त्योहारों के मौसम में यह राहत सीधे हर घर की खुशियों में इजाफा करेगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकलकर नियो मिडिल क्लास बने हैं। इस वर्ग की आकांक्षाएँ नई अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। पहले आयकर में छूट और अब जीएसटी में कमी, दोनों मिलकर मध्यमवर्ग और गरीब तबके को “डबल बोनस” देंगे। घर, गाड़ी या अन्य ज़रूरी सामान खरीदना अब पहले से कहीं आसान होगा।
छोटे व्यापारी और दुकानदार भी इस सुधार से उत्साहित हैं। सरकार का दावा है कि कर कटौती का लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुँचेगा। कई जगह दुकानदार पुराने और नए दामों की तुलना दिखाकर उपभोक्ताओं को जागरूक कर रहे हैं। इससे न केवल भरोसा बढ़ेगा बल्कि बाजार में पारदर्शिता भी आएगी

आत्मनिर्भर भारत अभियान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से एमएसएमई यानी लघु और कुटीर उद्योगों की भूमिका पर जोर दिया। उनका मानना है कि जीएसटी दरों में कमी और प्रक्रियाओं में सहजता से छोटे उद्योगों को नई ताकत मिलेगी। उनकी बिक्री बढ़ेगी, लागत घटेगी और वे विश्वस्तरीय उत्पाद पेश कर पाएंगे। यही वर्ग भविष्य में भारत की निर्माण शक्ति और गौरव का आधार बनेगा।

अंततः प्रधानमंत्री ने स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैसे स्वतंत्रता संग्राम में स्वदेशी का मंत्र हमारी ताकत बना, वैसे ही आज की आर्थिक आज़ादी भी स्वदेशी पर ही निर्भर करेगी। हर घर और हर दुकान स्वदेशी उत्पादों से सजे, यही उनका सपना है। केंद्र और राज्य मिलकर यदि इस दिशा में बढ़ें तो न केवल आत्मनिर्भर भारत बल्कि विकसित भारत का लक्ष्य भी शीघ्र ही हासिल होगा।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!