शिमला 21/09/2025, राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को सुदृढ़ करने और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को “पशु मित्र नीति-2025” की घोषणा की। इसके तहत नियुक्त किए जाने वाले पशु मित्र अपने ही क्षेत्र में कार्य करेंगे और उनका तबादला नहीं होगा। उन्हें प्रतिदिन केवल चार घंटे कार्य करना होगा, जिसके बदले पांच हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को सुलभ बनाने और नस्ल सुधार की सुविधाओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पशु मित्र किसान और पशु चिकित्सक के बीच एक सेतु की तरह काम करेंगे।
जहां पशु चिकित्सालय गांवों से दूर हैं, वहां यह पहल किसानों को त्वरित सहायता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि समुदाय आधारित पशुपालन कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। अब स्थानीय युवाओं को पशु मित्र बनाकर इस परंपरा को और आगे बढ़ाया जाएगा। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण स्तर पर पशुधन प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होगी।
इस नीति के तहत पहले चरण में 1,000 युवाओं को प्रशिक्षण देकर नियुक्त किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पालतू पशुओं की त्वरित स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसके साथ ही पशु मित्र पशुपालन विभाग की योजनाओं से जुड़कर मानव-पशु संघर्ष और बेसहारा पशुओं की समस्या पर भी ग्रामीणों को जागरूक करेंगे। नियुक्ति के लिए शर्त रखी गई है कि उम्मीदवार संबंधित ग्राम पंचायत या नगर निकाय का निवासी होना चाहिए। उनकी जिम्मेदारियों में पशु चिकित्सालयों और पशुधन फार्मों में काम करना, बड़े पशुओं को संभालना, तरल नाइट्रोजन के कंटेनर उठाना और गर्भावस्था राशन योजना के अंतर्गत चारे की बोरियां लाभार्थियों तक पहुंचाना शामिल होगा।
सरकार ने पशु मित्रों की नियुक्ति के लिए समिति का गठन किया है।
इसमें उपमंडल अधिकारी या उनके प्रतिनिधि अध्यक्ष होंगे, जबकि वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी सदस्य सचिव और संबंधित पशु चिकित्सक सदस्य होंगे। यह समिति चयन प्रक्रिया की देखरेख करेगी और कार्यप्रणाली पर नजर रखेगी। नियुक्त पशु मित्र घर-घर जाकर पशुओं की जांच करेंगे, प्राथमिक उपचार देंगे, टीकाकरण करेंगे और किसानों को पशुओं की देखभाल संबंधी जानकारी देंगे। इससे ग्रामीण स्तर पर पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
पशु मित्रों को अवकाश और सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है।
उन्हें हर महीने की सेवा के बाद एक दिन का अवकाश मिलेगा, साल भर में अधिकतम 12 छुट्टियां ली जा सकेंगी। इसके अलावा रविवार और राजपत्रित अवकाश भी मान्य होंगे। महिला पशु मित्रों को, यदि उनके दो से कम बच्चे हैं, तो 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। उपस्थिति रिपोर्ट हर माह पांच तारीख तक पशु चिकित्सा संस्थान के इंचार्ज द्वारा प्रस्तुत करनी होगी। इस नीति से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा, वहीं युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और समाज को मजबूत पशुधन प्रबंधन की सुविधा भी मिलेगी।

