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हिमाचल प्रदेश में शराब ठेकों से सरकार को बड़ी आमदनी हो रही है। प्रदेश में करीब 2100 शराब के ठेके हैं और हर साल इनसे करोड़ों का कारोबार होता है। हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने शराब नीति से जुड़ा सवाल उठाया था, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विस्तृत जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 87 क्लस्टर ठेकों की नीलामी 1795.06 करोड़ रुपये में हुई थी। इस दौरान 2776.41 करोड़ की आय हुई, जबकि 25.38 करोड़ रुपये अभी बकाया हैं। इससे पहले 2023-24 में 2631 करोड़ की आय हुई थी और 92.55 करोड़ बकाया रहा। यानी सरकार को शराब नीति से निरंतर बड़ा राजस्व प्राप्त हो रहा है, हालांकि कुछ ठेकेदार समय पर भुगतान नहीं कर पाए हैं।
बकाया राशि के मामले में शिमला जिला सबसे आगे है। यहां 11 ठेकेदारों पर कुल 13.25 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा कांगड़ा में 8 ठेकेदारों पर 5.12 करोड़, सोलन में 3 ठेकेदारों पर 6.22 करोड़, किन्नौर में 51 लाख और उना जिले में एक कंपनी पर 27.30 लाख रुपये का बकाया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बड़े जिलों में शराब कारोबार का दायरा और भुगतान का दबाव भी अधिक है।
सरकार ने शराब की हर बोतल पर 6 प्रकार के सेस लगाए हैं, जिनमें गौ सेस, मिल्क सेस, एंबुलेंस सर्विस फंड सेस, पंचायती राज इंस्टीट्यूशन सेस और प्राकृतिक खेती सेस शामिल हैं। इसके अलावा विधवा और दिव्यांग माता-पिता के बच्चों की सहायता के लिए भी सेस लगाया गया है। इनसे प्राप्त राशि को डेयरी उद्योग, दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और सामाजिक कल्याण योजनाओं में खर्च किया जाता है, जिससे शराब से होने वाली आय का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

