जवाली, 11/09/2025, संपादक राम प्रकाश
विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिद्धपुर-घाड़ की महाशा बस्ती के दर्जनों परिवार इन दिनों गहरी चिंता में हैं। वार्ड नं. 1 और वार्ड नं. 5 के लोगों का कहना है कि उन्हें वर्ष 1971 में सरकार द्वारा बूहल खड्ड के किनारे भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे। लेकिन आज हालात ऐसे बन गए हैं कि बरसात के मौसम में खड्ड का पानी उनकी जमीन तक पहुँच जाता है और कुछ हिस्से तो बह भी चुके हैं।
स्थानीय निवासी केवल सिंह, नीलम कुमारी, मुकेश कुमार, बलदेव सिंह, राकेश कुमार, प्रकाश चंद, शाम सिंह व रेखा देवी ने बताया कि खड्ड के किनारे पट्टों पर मकान बनाना गरीब परिवारों के लिए लगभग असंभव है। मजबूरी में लगभग 40 परिवारों ने वर्षों पहले पास की सरकारी भूमि पर झुग्गी-झोपड़ी और पक्के मकान खड़े कर लिए। “हमने पाई-पाई जोड़कर अपनी जिंदगी भर की कमाई से घर बनाए हैं। अब उजड़ने का डर हमें चैन से जीने नहीं दे रहा,”
ग्रामीणों ने कहा।इसी समस्या को लेकर आज करीब छह दर्जन लोग, जिला कांगड़ा कांग्रेस के युवा महासचिव सचिन गुलेरिया की अगुवाई में, कृषि एवं पशुपालन मंत्री चौधरी चन्द्र कुमार के निवास पर पहुँचे। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि करीब 80 वर्षों से लोग सरकारी भूमि पर रह रहे हैं और अब यही उनका असली आशियाना बन चुका है।
ग्रामीणों की मांग है कि पुराने पट्टों का तबादला कर उनकी मौजूदा बस्ती को ही कानूनी मान्यता दी जाए।सचिन गुलेरिया ने बताया कि मंत्री ने पूरे धैर्य से ग्रामीणों की व्यथा सुनी और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर तुरंत एसडीएम ज्वाली को जानकारी देने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि वह खुद भी जल्द ही महाशा बस्ती का दौरा करेंगे और लोगों की स्थिति का जायजा लेकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ उनका निजी मसला नहीं बल्कि गरीब तबके के अस्तित्व का सवाल है। दशकों से बसे परिवारों को उजाड़ने से न केवल उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा, बल्कि उनके बच्चों का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा।ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उन्हें राहत और सुरक्षा प्रदान की जाए। उनके मुताबिक, “हम कोई अवैध कब्जाधारी नहीं बल्कि मजबूरी के मारे अपने घरों को बचाने वाले गरीब परिवार हैं।”—👉 क्या आप चाहेंगे कि मैं इसे समाचार पत्र कटिंग शैली (बड़े हेडलाइन, उपशीर्षक और कॉलम) में भी तैयार कर दूँ?

