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उतराखंड ,हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, के समाचार कंहा आपदा ने ने किया लोगों का जीना किया हराम।

RamParkash Vats
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भरमाड़: 30 अगस्त 2025 सुबह के समाचार संपादक राम प्रकाश वत्स

हिमाचल में मणिमहेश यात्रा और प्राकृतिक आपदा की ताज़ा स्थिति

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक30 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मणिमहेश यात्रा और आपदा प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब कोई भी यात्री फंसा नहीं है। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है और उन्हें भोजन, चिकित्सा सुविधा और आश्रय उपलब्ध करवाया गया है। श्रमिकों और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता बताई गई।

मुख्य सचिव का आश्वासन

मुख्य सचिव प्रभोध सक्सेना ने कहा कि करीब 3,000 श्रद्धालु जो भर्मौर में फंसे थे, उन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया है। चंबा जिले में जलापूर्ति, बिजली और संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास तेज़ी से चल रहे हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि आपात सेवाएं लगातार बहाल की जा रही हैं और राहत कार्य पूरे ज़ोर पर हैं।

फंसे श्रद्धालुओं की संख्या और कठिनाई

भारी बारिश और भूस्खलनों की वजह से यात्रा बीच में रोकनी पड़ी थी। लगभग 3,000 लोग भर्मौर और 10,000 के आसपास लोग चंबा में फंसे हुए थे। यह स्थिति अचानक आई प्राकृतिक आपदा का नतीजा थी, जिसने न सिर्फ यात्री बल्कि स्थानीय लोगों को भी बुरी तरह प्रभावित किया।

दुर्गति और मौतें

आपदा के बीच अब तक 11 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से चार श्रद्धालु पंजाब के बताए जा रहे हैं। कई लोग घायल और कुछ लापता भी हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने इस बार की मणिमहेश यात्रा को रद्द कर दिया है। अधिकारियों ने साफ किया कि मार्ग अभी भी खतरनाक हैं, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

स्थानीय हालात और नुकसान

भूस्खलनों से कई सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं। चंबा और भर्मौर के बीच 20 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह खत्म हो गया है। लोग कई जगहों पर पैदल सफर कर रहे हैं। वहीं, रामपुर बुशहर, गोहर और नांडी पंचायत जैसे इलाकों में मकानों, दुकानों और उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि कई जगहों पर जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन करोड़ों की संपत्ति मलबे में दब गई।

हाईवे और परिवहन बाधित

मंडी-कुल्लू हाईवे, भरमौर-पठानकोट मार्ग समेत कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सड़कें बंद हैं। हणोगी के पास खोती नाले में पुलिस की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल सैकड़ों सड़कें, ट्रांसफार्मर और पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।

प्रदेशव्यापी आपदा और अलर्ट

मौसम विभाग ने 1 और 2 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कुल्लू और शिमला में येलो अलर्ट लागू किया गया है। कई जिलों में शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। उधर, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी बादल फटने और भूस्खलनों से भारी तबाही हुई है, जिससे दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।

सरकारी प्रयास और आगे की चुनौती

मुख्यमंत्री सुक्खू चंबा के प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे। उनके साथ राजस्व मंत्री और लोक निर्माण मंत्री भी मौके पर पहुंच रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि भले ही सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं, लेकिन हालात सामान्य करने में समय लगेगा। सड़कों और बुनियादी ढांचे की बहाली सबसे बड़ी चुनौती है।

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से भयानक तबाही मची हुई है.

बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ से कई लोगों की जान गई है, सैकड़ों लोग लापता हैं. रामबन, रियासी, चमोली, रुद्रप्रयाग, और बागेश्वर जैसे जिलों में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है. लोगों के घर डूब गए हैं, फसलें तबाह हो गई हैं.


पहाड़ों पर बारिश-भूस्खलन से तबाही


पहाड़ी राज्यों पर बारिश कहर बनकर बरस रही है. जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश-भूस्खलन के चलते हुई घटनाओं में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है. सैकड़ों लोग लापता हैं. इस आसमानी आफत ने कई लोगों के आशियाने उजाड़ दिए और उन्हें बेघर कर दिया. किसी से उसका बेटा छीन लिया तो किसी बच्चे से उसकी मां छीन ली. जम्मू-कश्मीर में अब तक बारिश-भूस्खलन से 51 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, उत्तराखंड में शुक्रवार को ही 6 लोगों की मौत हो गई. इसके साथ हिमाचल के चंबा में 10 लोगों की जान चली गई है.

जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं. रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि अचानक आई बाढ़ में कई मकान जमींदोज हो गए. कुछ घर बाढ़ के तेज पानी में बह गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है. वहीं रियासी के माहौर इलाके में भूस्खलन से बड़ी तबाही हुई, जहां पहाड़ का मलबा एक घर पर गिरने से सात लोगों की जान चली गई. हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है

जम्मू संभाग में सोमवार से अब तक मृतकों की संख्या 54 हो गई है

कटरा में 34 लोगों की मौत

रियासी में 7 लोगों की मौत

रामबन में 3 लोगों की मौत

जम्मू जिले में 5 मौतें (जिनमें 1 आर्मी जवान और 1 बीएसएफ जवान शामिल)

डोडा में 4 लोगों की मौत

कठुआ में 1 मौत
उत्तराखंड में शुक्रवार तड़के मूसलाधार बारिश से बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से मची तबाही में एक पति-पत्नी समेत छह लोगों की मौत हो गई और इस घटना में 11 लोग लापता हो गए. गुमशुदा लोगों की संख्या अभी बढ़ सकती है. घटना में कई लोग घायल भी हो गए. अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर में प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा कहर बरपा, जहां कई मकान और मवेशी मलबे में दब गए, खेती की जमीन बर्बाद हो गई कई गाड़ियां भी बह गईं. यहां तक की कई गांवों से संपर्क तक टूट गया.

दो की हुई मौत और तीन लापता

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) के मुताबिक बागेश्वर के कपकोट के पौसारी गांव में तड़के तीन बजे भारी बारिश के कारण पहाड़ी से मलबा आने से पांच-छह मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जिसकी वजह से दो महिलाओं की मौत हो गई और तीन लोग लापता हो गए. इस हादसे में मृतक महिलाओं की पहचान बसंती देवी जोशी और बचुली देवी के रूप में हुई है. वहीं लापता व्यक्तियों में बसंती देवी के पति रमेश चंद्र जोशी, गिरीश और पूरण जोशी के नाम शामिल हैं.

शुक्रवार को चमोली के थराली के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से पति-पत्नी की मौत हो गई. चमोली के जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मोपाटा में एक मकान और गौशाला भूस्खलन की चपेट में आ गए, जिससे उसमें रह रहे तारा सिंह और उनकी पत्नी कमला देवी की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि मलबे में दबे विक्रम सिंह और उनकी पत्नी को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उन्हें चोटे आई हैं.

जिले में तीन जगहों पर बादल फटा

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक गौशाला में बंधे करीब 25 मवेशी भी मलबे में लापता हो गए. अधिकारियों ने बताया कि रुद्रप्रयाग के बसुकेदार और जखोली क्षेत्रों के छह गांवों में लगातार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि जिले में तीन जगहों पर बादल फटे. प्राधिकरण के मुताबिक रुद्रप्रयाग के आधा दर्जन गांवों-तालजामण, छेनागाड़, बड़ेथ, स्यूरं, किमाणा और अरखुंड में तड़के पौने चार बजे भारी बारिश से बरसाती नालों में पानी और मलबा आने से कुछ मकान और गौशाला क्षतिग्रस्त हो गए.

बाढ़ में 30-40 परिवार फंस गए

बरसाती नालों में बाढ़ आने से 30 से 40 परिवार फंस गए थे और अब तक वहां से 200 लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. टिहरी के बालगंगा क्षेत्र के गेंवाली गांव में भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ. हालांकि, इसमें कोई जनहानि नहीं हुई. गेंवाली गांव में दो मंदिर, दो छानियां और एक गौशाला, कृषि भूमि और गांव के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से बातचीत कर बचाव एवं राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए.

लगातार बारिश से अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों और मंदाकिनी नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है. बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारी देवी और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी का पानी सड़क पर बहने लगा, जिसकी वजह से उस पर वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा. पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मिनी गोवा बीच के पास सड़क पर पानी भरने के बाद वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया गया. हालांकि, करीब दो घंटे बाद नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद मार्ग को खोल दिया गया.

भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’

नदी का जलस्तर बढ़ने पर एहतियातन धारी देवी क्षेत्र की दुकानों और नदी के किनारे स्थित छह स्कूलों को तुरंत बंद करवा दिया गया. अब मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ और चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर, उत्तरकाशी जिलों के लिए बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है.

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