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हिमाचल प्रदेश : डीए पर अटका कर्मचारियों का हक, आंदोलन का अल्टीमेटम

RamParkash Vats
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शिमला, 24 अगस्त 2025, राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल

हिमाचल प्रदेश में लाखों कर्मचारियों का महंगाई भत्ते (डीए) का इंतजार लगातार लंबा खिंच रहा है। बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तीन प्रतिशत डीए देने की घोषणा अवश्य की थी, लेकिन अब तक कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। इस देरी को लेकर कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

विधानसभा में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा और अब कर्मचारी संगठनों ने सरकार को अंतिम चेतावनी दे डाली है—अगर डीए जल्द जारी नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन होगा।शनिवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हिमाचल अध्यापक संघ के अध्यक्ष एवं संयुक्त कर्मचारी महासंघ के नेता वीरेंद्र चौहान ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। चौहान ने साफ कहा कि सरकार वित्तीय कठिनाइयों का बहाना बनाकर कर्मचारियों के हकों से समझौता न करे। उनके मुताबिक कर्मचारियों के 13 प्रतिशत डीए की किस्त पहले से ही लंबित है और इस कारण लाखों कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।

सवाल उठाते हुए चौहान ने कहा, “जब सरकार बार-बार वित्तीय संकट न होने की बात कहती है, तो फिर डीए रोकने का औचित्य क्या है?”चौहान ने चेताया कि यदि शीघ्र फैसला न लिया गया तो प्रदेशभर के कर्मचारी संगठित होकर सख्त आंदोलन करेंगे। उन्होंने शिक्षा विभाग की दुर्दशा पर भी चिंता जताई। चौहान ने बताया कि हजारों शिक्षकों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जिसकी वजह से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

इस स्थिति में छात्र निजी संस्थानों का रुख कर रहे हैं और सरकारी स्कूलों की संख्या घटती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्कूल बंद करना कोई समाधान नहीं, बल्कि नई नियुक्तियां ही शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर ला सकती हैं।इधर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा सत्र में कर्मचारियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए माना कि प्रदेश की वित्तीय हालत फिलहाल ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि डीए की किस्त जारी करने में देरी मजबूरी वश हुई है, लेकिन जैसे ही परिस्थितियाँ सुधरेंगी, कर्मचारियों को लंबित डीए का भुगतान कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते दस वर्षों से राज्य सरकार पर कर्मचारियों की करीब दस हजार करोड़ रुपये की देनदारी शेष है। ऐसे में डीए को लेकर असंतोष आने वाले समय में सुक्खू सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। कर्मचारी संगठनों का सख्त रुख और आंदोलन की चेतावनी सरकार के लिए नए संकट का संकेत दे रहा है।

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