
नई दिल्ली 20/08/2025 संपादन राम प्रकाश की
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए। उन्होंने कहा कि यह कदम देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश के जवाब में उठाया गया है।
श्री शाह ने स्पष्ट किया कि इस संशोधन के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र एवं राज्य सरकारों के मंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जेल में रहते हुए सरकार नहीं चला पाएंगे। उनका कहना था कि हाल के वर्षों में यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति देखी गई है कि कुछ नेताओं ने बिना इस्तीफा दिए जेल से ही सरकार चलाई, जो लोकतंत्र और सार्वजनिक नैतिकता के लिए बेहद हानिकारक है।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, अगर कोई नेता गिरफ्तार होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अदालत से जमानत लेनी होगी। यदि वह इसमें असफल रहता है, तो 31वें दिन स्वतः ही उसके पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। हालांकि, अदालत से जमानत मिलने पर वह पुनः अपने पद पर लौट सकता है।
शाह ने कहा कि यह व्यवस्था राजनीति में ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।गृह मंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को कानून के दायरे में लाने के लिए संविधान संशोधन ला रहे हैं,
जबकि दूसरी ओर विपक्ष इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है क्योंकि वह जेल से भी सरकार चलाने की प्रवृत्ति को बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह रवैया भ्रष्ट नेताओं को बचाने की मानसिकता को उजागर करता है।
श्री शाह ने याद दिलाया कि आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री ने 39वें संविधान संशोधन के जरिए खुद को कानूनी कार्यवाही से बचाने के लिए विशेषाधिकार दिए थे। इसके विपरीत, एनडीए सरकार की नीति प्रधानमंत्री और मंत्रियों को कानून के दायरे में लाने की है। उन्होंने विपक्षी दलों के अशोभनीय आचरण को जनता के सामने विपक्ष की असली सोच और भ्रष्टाचार-समर्थक राजनीति का खुलासा करार दिया।

