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मुख्य कार्यालय,भरमाड़ (जवाली) हिमाचल न्यूज़ रूम, संपादक राम प्रकाश वत्स
शिमला:विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को भू-संपदा (विनियमन और विकास) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस संशोधन के माध्यम से राज्य के हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और प्रशासनिक रूप से सक्षम बनाना चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक शहरी विकास मंत्री राजेश धर्माणी ने सदन में विधेयक को पुनर्विचार के लिए प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया कि प्राधिकरण की चयन प्रक्रिया में स्पष्टता और दक्षता लाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चयन समिति के ढांचे में परिवर्तन है।
अब तक समिति की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति करते थे, लेकिन नए प्रावधान के तहत यह जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि रेरा मुख्यतः एक प्रशासनिक निकाय है, इसलिए प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी की अध्यक्षता से नियुक्ति प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और समयबद्ध हो सकेगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बदलाव से न्यायपालिका की प्रत्यक्ष भागीदारी समाप्त होगी और कार्यपालिका को योग्यता आधारित नियुक्तियां करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस पर सतर्कता बरतने की आवश्यकता जताई है, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।
विधेयक में यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल अब चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक सीमित रहेगा। सूत्रों के अनुसार पुनर्नियुक्ति पर रोक लगाकर निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष पद के लिए संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम 20 वर्ष और सदस्य पद के लिए 15 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया है। सूत्रों का मानना है कि इन प्रावधानों से प्राधिकरण की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

